जज साहब ने पूछा किसके साथ रहना चाहती हो? बच्ची ने किया इशारा और हो गया फैसला

0
10

जब माता पिता न हो या फिर वो बच्चो को उपलब्ध किसी भी कारण से न हो सके तो फिर ऐसी स्थिति में चीजे थोड़ी अलग तरीके से कार्य करती है. कही न कही इस बात का दुःख हर कोई तो नही समझ सकता है लेकिन कोर्ट के ऊपर एक तरह की जिम्मेदारी तो होती ही है कि इस तरह के बालको को उचित न्याय मिल सके और वो ऐसा करवाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आते भी है. अभी हाल ही में राजस्थान में भी ऐसा ही मामला देखने में आया जिसने एक तरह की मिसाल कायम की है.

माँ नही रही, पिता पर लगा है जान लेने का आरोप
आज से कुछ वर्ष पहले ही सुनीता नाम की राजस्थान निवासी लड़की की शादी हरियाणा के रहने वाले परविंदर सिंह के साथ हुई थी. शादी के कुछ वक्त बाद ही सुनीता की जान ले ली गयी और उसके घर वालो का कहना है कि पति ने ही उसकी जान ली है. खुद छोटी सी बच्ची लावण्या ने भी कोर्ट में बयान में कहा है कि उसके पिता ने ही उसकी माँ की जान ली है और ये कहना उसके लिए आसान तो कही से नही रहा होगा.

कोर्ट ने बच्ची की इच्छा के आधार पर मौसी को सौंपी
अब माँ तो रही नही और पिता कोर्ट की प्रोसीडिंग में है तो बच्ची किस तरफ जाए? आखिर उसे भी तो एक गार्जियन की आवश्यकता है और इसी आधार पर एक तरफ तो लावण्या के बुआ और परविंदर के घर वाले थे जो उसे अपने यहाँ पर ले जाना चाहते थे और दूसरी तरफ उसकी मौसी और नाना वगेरह थे जो उसे अपनी तरफ ले जाना चाहते थे.

कोर्ट ने बच्ची को कोर्ट में बुलाया और उसीसे पूछ लिया कि आखिर वो किस तारफ जाना चाहती है? तो इसका जवाब देते हुए बच्ची ने अपनी मौसी की तरफ इशारा कर दिया. बस फिर क्या था राजस्थान हाई कोर्ट के जज ने साफ़ तौर पर फैसला सुनाते हुए सुनीता कंवर के घर वालों यानी उसकी मौसी को फ़िलहाल के लिए बच्ची की कस्टडी सौंप दी है.

इसके अलावा लडकी के पिता के ऊपर जो केस की प्रोसीडिंग चल रही है वो तो चलने ही वाली है. कही न कही यहाँ पर एक बात गौर करने वाली है कि आम तौर पर एक चाइल्ड की गवाही या फिर बयान को इतनी अधिक तबीयत से माना नही जाता है लेकिन जब बात उसी के भविष्य की हो तो उसकी बात कोर्ट के लिए मायने तो रखती है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here