भारत के 90 हजार करोड़ से अधिक रूपये अफ्रीका में फंस चुके है

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आज भारत विश्व की एक बहुत ही बड़ी व विशाल अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है और हम देख भी रहे है कि किस तरह से कभी दुनिया से लोन लेकर के अपना गुजारा चलाने का प्रयास करने वाला एक वक्त का भारत आज दुनिया के कई गरीब व जरूरतमंद देशो को पैसा देकर के उन्हें विकास करने में काफी अधिक सहायता कर रहा है. मगर अभी के जो हालात है उसमे भारत का काफ़ी सारा पैसा अफ्रीका में फंसते हुए नजर आ रहा है क्योंकि यहाँ पर भारत का निवेश काफी भारी है.

लोन चुका पाने में असमर्थ है कई अफ्रीकी देश
भारत ने पिछले एक से दो दशक में अफ्रीकी देशो जैसे जिम्बावे, मोजाम्बिक आदि को भर भरके लोन बांटे है और इनकी मदद से कई बड़ी बड़ी बिल्डिंगे अफ्रीकी देशो में बनाई जा रही है. ऐसा करने के पीछे का कारण यही है कि भारत और चीन अभी अफ्रीका में जो विकास की लहर आने वाली है उसमे अपनी कम्पनियों को सेटल करके काफी मोटा मुनाफ़ा कमाना चाह रहे है और इस कारण से निवेश किया जा रहा है.

मगर जिस तरह से करोना काल में और मंदी के चलते हुए विश्व भर की अर्थव्यस्थाओ पर असर पड़ा है उससे एक बात तो साफ़ तौर पर नजर आ रही है कि लोन चुका पाने की क्षमता काफी अधिक कम हो गयी है और इसी कारण से वर्तमान में कई इकनोमिक रिपोर्ट्स और बयान बताते है कि भारत का भारी भरकम पैसा जो अफ्रीका को दिया गया है वो वापिस आने की संभावना कम हो गयी है.

अफ्रीकी देश भारत को ऑफर करना चाह रहे अपने रिजर्व
हालांकि अब पैसा किसी न किसी रूप में तो चुकाना ही होगा और इस कारण से कई अफ्रीकी देशो ने भारत को लेकर के कहा है कि वो भविष्य में यदि लोन नही चुका पाते है तो भारत को अपने लिथियम भंडारों का एक्सेस प्रदान कर देंगे जिनका खनन करके भारतीय कम्पनियां अपने पैसे की भरपाई कर सकती है.

ये सौदा भारत को लोन वापिस हासिल करने में तो मदद करेगा ही साथ ही में भारतीय कम्पनियों को भी अफ्रीका में पाँव जमाने में काफी मदद करेगा. हालांकि अभी तो मोदी सरकार यही चाहती है कि जैसे तैसे करके जितना पैसा वापिस निकाला जा सकता है कम से कम वो तो आ ही जाये.

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