एक और राज्य में बीजेपी सरकार ने पास पारित किया धर्मान्तरण क़ानून, अवैध धर्मान्तरण बंद

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देश भर में समय समय पर धर्म का गलत तरीके से बदला जाना अपने आप में एक बहुत ही बड़ी समस्या बन चुका है और ये बात किसी से भी छुपी हुई नही है. कही न कही वक्त के साथ में स्थिति परिस्थितियाँ बदली है और हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाये कि कई बार जबरदस्ती तो कई बार लालच देकर के धर्म परिवर्तन के कार्य हो रहे है और इनको किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए. इस पर कई राज्य कदम पहले ही उठा चुके है और इस लिस्ट में अब हिमाचल प्रदेश का नाम भी साथ में जुड़ चुका है.

हिमाचल सरकार ने पारित किया हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2022
अभी हाल ही में हिमाचल प्रदेश की विधानसभा ने पूरे मत के साथ में धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2022 को पारित कर दिया है और इसके बाद में अब ये इस राज्य में क़ानून की शक्ल ले चुका है जो अपने आप में बहुत ही अधिक बड़ा निर्णय कहा जा सकता है. इसका श्रेय पूर्ण रूप से प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को दिया जा रहा है.

इस विधेयक के अनुसार अगर कोई दो या दो से ज्यादा लोगो का जबरदस्ती या फिर किसी भी प्रकार का प्रलोभन देकर के धर्मान्तारण करवाता है या फिर करवाने का प्रयास करते हुए पाया जाता है तो फिर ऐसे आरोपी को 10 साल तक के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. वही आरक्षित लोग धर्म परिवर्तन करते तो फिर उन्हें आरक्षण का लाभ नही मिलेगा और यदि वो छुपाते है तो फिर उन पर 1 लाख तक का जुर्माना भी लगेगा.

धर्म परिवर्तन से पहले देना पड़ेगा एफिडेविट इस नए नियम के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना भी चाहता है तो फिर उसे एक महीने पहले ही मजिस्ट्रेट के सामने एफिडेविट देना पड़ेगा कि वो अपनी इच्छा से परिवर्तन कर रहा है और तभी उसे वैलिड माना जाएगा. हालांकि अगर कोई अपने मूल धर्म में फिर से वापसी करना चाहता है तो फिर ऐसा करने की आवश्यकता नही रहेगी.

अभी के लिए केथोलिक यूनियन और कई संगठन है जो इस तरह के क़ानून का विरोध कर रहे है और इसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ भी बता रहे है. जाहिर सी बात है कि यदि ऐसा कुछ हो तो इंसान को क़ानून के हिसाब से ही चलना होगा.

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