भाजपा की सबसे बड़ी गलती: बिहार में चिराग पासवान को छोड़कर नीतीश का हाथ थामना

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भारतीय जनता पार्टी और इसका हाई कमान वैसे तो अपने आप में काफी बुद्धिमता से भरे निर्णय लेने के लिए जाना जाता है और इसी के कारण से पिछले एक दशक में इस पार्टी ने इसी कारण से अप्रत्याशित रूप से प्रगति भी की है जिसमे कोई भी संशय नही है. मगर जब हम बात करते है सही मायनों में तो कई जगहों पर बड़े बड़े लोग भी गलतियाँ कर ही जाते है और हाल ही के हालातो के चलते हुए  भारतीय जनता पार्टी की एक गलती की तरफ हर कोई इशारा कर ही रहा है.

एलजेपी को नकार जेडीयू को पूर्ण रूप से अपनाया, पासवान ने दूर होने के बाद भी दिखायी मोदी के प्रति निष्ठा
भाजपा ने नीतीश कुमार के ट्रैक रिकॉर्ड के बारे में जानकारी होते हुए भी एक बार फिर जेडीयू के साथ मिलकर के चुनाव लड़ा और नीतीश के ही दबाव में रहते हुए अपने बिहार में तत्कालीन ख़ास नेता चिराग पासवान से दूरी बना ली. इस कारण से भाजपा उस समय के लिए तो सत्ता में आ गयी लेकिन अधिक सीट्स होने के बाद भी वो बिहार में अपना मुख्यमंत्री नही दे पायी.

नीतीश सत्ता में रहते हुए अपने  हिसाब से राज्य चलाते रहे, भाजपा नेताओं से उलझते रहे और प्रसिद्द नेता गिरिराज सिंह से उनकी कहासुनी तो बिलकुल भी अनसुनी नही है. इन सबके बावजूद एनडीए की सरकार नीतीश के साथ में चलाई गयी  और जब नही चली तो नीतीश ने भाजपा को छोड़ तेजस्वी का हाथ थाम लिया और चाहे सब कुछ बदल गया लेकिन वो सीएम पद पर बने रहे.

चिराग बार बार करते रहे आगाह
चिराग पासवान को एनडीए से दूर कर एनडीए बिहार में अपनी मोनोपोली स्थापित कर चुकी जेडीयू को लेकर चिराग ने बार बार भाजपा को आगाह करने का प्रयास किया कि चाहे हम इनकी तुलना में छोटे दल है लेकिन हम आपके साथ में हर अच्छे बुरे समय में बने रहना चाहते है और राजनीतिक विश्लेषक भी यही मानते है. आपको जानकर हैरानी होगी कि भाजपा द्वारा इतना नजरअंदाज करने के बावजूद एलजेपी ने भाजपा से कही भी किसी सीट पर टकराव लेने से बचाव ही किया.

बीजेपी और एलजेपी को मिलकर के संभव है कुछ सीटे कम मिल पाती लेकिन उस समय भाजपा हमेशा एक प्रभावी और बड़े भाई की भूमिका में रहती और ये अपने आप में एनडीए के एक स्थायी भविष्य के लिए बेहतर संकेत बन पाता.

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