संघ ने भारत का एक बड़ा इलाका आजाद कराया था, फिर उसे नेहरु सरकार को दे दिया

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आम तौर पर ये कहा जाता रहा है कि राष्ट्रीय स्वयमसेवक संघ की आजादी की कोई भूमिका नही रही है. इस तरह के आरोपों पर संघ जवाब भी नही देता है लेकिन असल में ये बात उतनी ही सत्य है जितना कि सीरिया में शान्ति होने का दावा किया जाता है. इतिहास में इसके तथ्य मौजूद है कि कई बार संघ से जुड़े लोगो ने अपनी जान को हथेली पर लेकर देश को आजाद करवाने हेतु योगदान दिया और उसमे दादर और नगर हवेली जो वर्तमान में भारत का केंद्र शासित प्रदेश है उसे स्वतंत्र करवाना एक बड़ा महत्त्वपूर्ण कार्य रहा.

पुर्तगाल शासन के अधीन था दादर नगर हवेली, नेहरु सरकार ने गंभीरता से नही लिया
वर्ष 1947 में देश आजाद हो चुका था और देश में कुछ वर्षो में एक लोकतांत्रिक संविधान भी आ गया. मगर देश के कुछ हिस्सा जैसे गोवा, दादर आदि अभी भी पुर्तगाल के शासन में थे और इसे भारत की तत्कालीन सरकार उस समय इतनी अधिक गंभीरता के साथ में नही लेते दिख रही थी क्योंकि उनके पास में संभालने को पूरा देश था और ऐसे में वो क्या क्या करते?

1954 में संघ के स्वयमसेवक घुस गये थे दादर नगर हवेली में, करवाया था पुर्तगाल से सरेंडर
जब राष्ट्रीय स्वयमसेवक संघ ने देखा कि एक जगह जहाँ का क्षेत्रफल पूरे 185 वर्गमील है और बड़ी संख्या में भारतीय आज भी वहां पर गुलामी में जी रहे है तो उन्होंने खुद के स्तर पर ही इस क्षेत्र को आजाद करवाने का निर्णय किया और संघ के स्वयमसेवक बड़ी संख्या में दादर और नगर हवेली के क्षेत्र में घुस गये.

उस समय उन्हें भारत से परोक्ष समर्थन तो था लेकिन प्रत्यक्ष रूप से वो अकेले ही अग्रणी रूप में गये और पुर्तगाली सैनिको से लोहा लेकर उन्हें सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया. इसके बाद में ये पूरा क्षेत्र राष्ट्रीय स्वयमसेवक संघ के कण्ट्रोल में आ गया. उन्होंने इसकी सूचना भारत सरकार को दी और इसे नेहरु सरकार को एक तरह से तोहफे के रूप में सौंप दिया.

उस समय  में 72 गाँवों वाले इस क्षेत्र पर विदेशियों ने काफी अधिक लम्बे समय तक शासन किया और आखिरकार ये क्षेत्र जब भारत में मिला तो धीरे धीरे करके इसने विकास करना शुरू किया. आज दादर और नगर हवेली भारत के अच्छे टूरिस्ट स्पोर्ट्स में से एक माना जाता है और लोग यहाँ पर एक अच्छा जीवन बिता रहे है.

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