राष्ट्रपति भवन में अब नही बनेगा मांसाहार, द्रोपदी मुर्मू सुबह 4 बजे उठकर करती है स्तुति पूजा

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भारत में प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति को माना जाता है और वही देश के सर्वोच्च नेता भी होते है. इस कारण से उनके राष्ट्रपति भवन में जो कुछ भी बदलाव या फिर डेवलपमेंट होते है वो अक्सर चर्चा का पात्र बनते रहे है और ये कई लोगो को बेहद पसंद आते है, तो फिर कई लोग इसे अपने हिसाब से नजरअंदाज कर देते है अगर वो उससे रिलेट नही कर पाते है. खैर अभी हम राष्ट्रपति भवन के मेनू के ऊपर बात कर रहे है जो कई लोगो के लिए दिलचस्प हो सकता है.

शुद्ध शाकाहारी है द्रोपदी मुर्मू, ईश्व में भी गहरी आस्था
आपको मालूम हो तो महामाहिम द्रोपदी मुर्मू उड़ीसा निवासी है और वहाँ का स्थानीय भोजन उनकी पहली पसंद है. इस कारण से अब भवन के मेनू में उड़ीसा का स्थानीय भोजन शामिल होगा और सहजन की सब्जी की खूब चर्चा चल रही है जो उन्हें काफी अधिक पसंद भी है. कहा जाता है जब वो अपने गाँव जाती है तो फिर भाई से इसी की सब्जी के लिए फरमाइश भी कर देती है.

अब क्योंकि राष्ट्रपति जी शुद्ध शाकाहारी है तो ऐसे में राष्ट्रपति भवन में मांस से बना कोई भी भोज या फिर ड्रिंक भी नही बनेगी. इसके अलावा क्योंकि द्रोपदी मुर्मू जी धार्मिक भी है और वो सवेरे 4 बजे उठकर के पूजा अर्चना व स्तुति भी करती है तो राष्ट्रपति भवन का माहौल भी कुछ वैसा ही धार्मिक सा रहने वाला है. इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को रोज खाने में फिश करी चाहिए होती थी तो उस वक्त नॉन वेज सबसे अधिक बनते देखा जाता था.

प्रथम राष्ट्रपति भी पसंद करते थे शाकाहार, पालथी पर बैठ करते थे भोजन
द्रोपदी मुर्मू ऐसा करने वाली पहली राष्ट्रपति नही है. भारत के प्रथम राष्ट्रपति और महामहिम डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी भी शाकाहार करना ही पसंद करते थे और इस कारण से अधिक लम्बे समय तक राष्ट्रपति भवन में तब मांस से बनी वस्तुओ पर प्रतिबन्ध लगा रहा.

हालांकि बादमे कई राष्ट्रपति आये और उनकी जरुरतो के हिसाब से चीजे इधर उधर होती रही, बदलती रही. मगर देश ने आदिवासी क्षेत्र व समुदाय से इतनी सशक्त महिला को इस पद पर बैठे हुए पहली बार देखा है जो ऐतिहासिक है.

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