प्रधानमंत्री मोदी ने घुमाया फोन, कहा मुझे मेरे जवानो के लिए इन्साफ चाहिये

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से ही अपने राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्ध नजर आते है. उनकी सेना के प्रति जो निष्ठा और प्रेम है वो अक्सर हम दिवाली जैसे पर्वो पर देखते रहे है कि कैसे वो इन अवसरों पर प्रधानमंत्री भवन की चकाचौंध को छोड़कर के सीमा पर चले जाते है, इससे मालूम चलता है वो देश के जवानो के प्रति कितना लगाव रखते है. इन सबके बीच में अगर कोई दूर सात समंदर पार देश के लिए शहीद हो जाता है तो ह्रदय में तकलीफ भी होती है और उसी को प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में जाहिर भी किया है.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को किया फोन, कहा शान्ति मिशन में शहीद सैनिको के मामले में हो सघन जांच
आपकी जानकारी में न हो तो बता दे कांगो में फिलहाल संयुक्त राष्ट्र अपनी शान्ति सेना तैनात किये हुए है और इसमें बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक भी है जो वहां पर अस्थिर सरकार को संभालने के लिए सहायता करते है. इस शान्ति मिशन में अभी हाल ही में खलल देखने को मिला जब तैनात सैनिको पर अटैक हो गया. इसमें भारत के जवान भी शहीद हुए और इस पर देश भर में शोक का माहौल था.

प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देखते हुए तुरंत प्रभाव से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को फोन किया और कांगो में शहीद हुए भारतीय जवानो के जो भी दोषी है उनके ऊपर कार्यवाही करने की मांग उठायी है. भारत ने जताने का प्रयास भी किया कि आज हिन्दुस्तान बड़ी संख्या में अपने जवान संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशन में भेज रहा है और ऐसे में उनके लिए सुरक्षा सुनिश्चित नही होगी तो फिर भारत इसमें आगे भी क्यों बढे?

शान्ति मिशन में असमानता भी है चिंता का कारण
वर्तमान में शान्ति मिशन के लिए विश्व भर में तैनात पीस कीपिंग फ़ोर्स में भारी असामनता देखने को मिली है. भारत अब तक 49 पीस कीपिंग मिशन का हिस्सा विश्व भर में रह चुका है और इसमें 2 लाख के करीब जवान शामिल रहे. आज भी अधिकतर विश्व के शान्ति मिशन के लिए भारत और साउथ एशिया के देश ही अपने सहयोग दे रहे है और यूरोप के जवानो का योगदान तुलनात्मक रूप से काफी कम आंका गया है.

ऐसे में साउथ एशियन देश बार बार इस बात को जनरल एसेम्बली में उठाने का प्रयास भी करते रहे है कि पीस कीपिंग मिशन में जो भी बदलाव समय के साथ में किये जाने हेतु आवश्यक है वो किये जाने चाहिए और जो जवान इस दौरान शहीद होते है वहां की सरकारों के साथ में कोऑपरेशन बढाकर उनके लिए न्याय को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिये.

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