देश भर के वैज्ञानिक हुए मोदी सरकार के इस फैसले से नाराज, बोले वापिस लो

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मोदी सरकार वैसे तो देश में विकास के लिए कई बड़े निर्णय ले रही है और इसके कारण से उनकी तारीफे भी सुनने में आती रहती है लेकिन सही मायनों में अगर हम लोग बात करते है तो इन दिनों में कुछ एक निर्णय ऐसे भी है जिसके चलते हुए बहुत ही बड़ी संख्या में वैज्ञानिक अपने अपने तरीके से प्रतिरोध दर्शा रहे है और कह रहे है कि भारत में आज जहाँ वैज्ञानिक रिसर्च की अधिक जरूरत है वहां पर सरकार के इस तरह से फैसले लेना किसी को भी समझ नही आ रहा है.

वैज्ञानिक उपकरणों पर लगेगा अब 18 प्रतिशत जीएसटी, रिसर्च करना होगा महंगा
आज देश और दुनिया में नए नए आविष्कार करने और खोज करने का कार्य वैज्ञानिक ही कर रहे है और ये बात हम भी बहुत अच्छे से जानते है. ऐसे में जाहिर तौर पर विज्ञान वर्ग से जुड़े लोग चाहते है कि उनके खोज में लगने वाला पैसा कम हो ताकि उनका कार्य सुलभ हो सके लेकिन सरकार के हाल ही के फैसले में जो हुआ है वो इसके उलट ही है.

जीएसटी काउंसिल के निर्णय के तहत अब वैज्ञानिक उपकरणों जैसे माइक्रोस्कोप आदि के ऊपर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया है जिससे कि मेडिकल, ऑटोमोबाइल्स, फिजिक्स, अन्तरिक्ष समेत अलग अलग क्षेत्रो में काम कर रहे और नयी खोज रहे लोगो के लिए आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है और इसके कारण से सरकार के साथ काम कर रहे वैज्ञानिको ने भी ये निर्णय वापिस लेने की अपील की है.

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का बजट भी घटा
हाल ही में सरकार का एक और निर्णय देखा गया जिसमें सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मंत्रालय के लिए केवल 14,217 करोड़ रूपये का बजट निर्धारित किया है और ये पिछले वर्ष की तुलना में 3.9 प्रतिशत कम हो गया है जिसके कारण से विज्ञान वर्ग में काम करने वाले लोग हतोत्साहित हो रहे है.

कई वैश्विक संस्थाएं भी इस बात को लेकर के चिंता जाहिर कर चुकी है कि भारत अपनी जीडीपी का 1 प्रतिशत हिस्सा भी रिसर्च पर खर्च नही कर रहा है और इसके कारण से यहाँ पर आविष्कार और खोजे यूरोप व चीन की तुलना में कम हो गयी है व नए प्रोडक्ट्स भी नही मिल पा रहे है जो मिल सकते थे. ऐसे में बजट बढाने की मांग तो चल ही रही है.

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