अडानी ने अकेले चीन को इजरायल में ले जाकर धो दिया, जिनपिंग रह गये खाली हाथ

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भारतीय उद्योगपति दुनिया भर में अपना परचम लहराते जा रहे है और ये अपने आप में काफी बड़ी बात ही. जिस तरह से पिछले कुछ समयकाल में हमने देखा है कि कैसे अडानी और टाटा जैसे समूहों का वर्चास्व बढ़ा है उसके कारण से भारत के प्रतिद्वंदी देशो को भारत के साथ में स्पर्धा करने में भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. अभी हाल ही में भी ऐसा ही कुछ हुआ है जब विश्व के सबसे आइकोनिक प्रोजेक्ट्स में से एक अडानी चीन के हाथो से उड़ा ले गये है.

इजरायल की सरकार का ऐलान, हाईफा पोर्ट अडानी को बेचा जाएगा
अभी विश्व भर में जगह जगह के बन्दरगाह बिक रहे है और इसमें चीन की सरकारी कम्पनियां व निजी कम्पनियां काफी अधिक रुचि ले रही है क्योंकि इसके जरिये कोई भी देश अपनी एक स्ट्रेटजिक पहुँच बाकी जगहों पर बना सकता है. चीन की कोशिश थी कि विश्व के सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बंदरगाहों में से एक हाईफा पोर्ट को भी वो खरीद ले लेकिन अडानी ने ऐसा होने नही दिया.

अभी आयी रिपोर्ट के मुताबिक़ अडानी समूह जल्द ही इजरायल की ही एक स्थानीय कम्पनी के साथ मिलकर के वहाँ के हाईफा पोर्ट का अधिग्रहण करने जा रहा है जिसकी डील पूरे 9500 करोड़ रूपये लगभग की कीमत में हुई है. इससे भारत के लिए कई फायदे हुए है जैसे स्ट्रेटजिक रिश्ते इजरायल से मजबूत होंगे और भारत को यूरोप तक व्यापार करने के लिए नया ट्रेड रूट भी मिल रहा है जो अपनी ही कम्पनी के पास है.

ऐतिहासिक रूप से भी महत्त्वपूर्ण
जब भी दुनिया के सबसे ऐतिहासिक स्थलों की बात आती है तो हाईफा का पोर्ट सबसे ख़ास है. ओटोमन साम्राज्य को खत्म करने के लिए इंग्लैंड समेत मित्र राष्ट्रों ने भी सबसे पहले इसी हाईफा बन्दरगाह को आजाद करवाया था और इसके बाद में यहूदियों के अपने देश यानी इजरायल की नींव पडनी शुरू हुई थी और इस नींव को डालने के लिए भारत के सैनिक भी शामिल हुए थे जिन्होंने हाईफा की लड़ाई लड़ी थी.

आज भारत की ही एक कम्पनी के पास में इस बन्दरगाह का आ जाना अपने आप में समय चक्र के दुबारा से उसी तरह से घूम जानते के जैसा है. कही न कही ये बहुत ही ज्यादा ख़ास और बेहतरीन है जो अब हुआ है.

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