नुपुर शर्मा ने जाते जाते मोदी जी को बड़ा सबक दे दिया

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भाजपा की कभी एक समय में प्रखर प्रवक्ता और पोपुलर नेता रही नुपूर शर्मा काफी अधिक लोकप्रिय बन चुकी है और लोग उन्हें अच्छा खासा जानने भी लगे है. हाँ उन्हें पार्टी से निलंबन का सामना करना पडा और ये अपने आप में बहुत ही अधिक चिंता का विषय उनके राजनीतिक करियर के लिए रहा. खैर जो भी है अगर हम अभी की बात करते है तो वो दल से तो चली गयी लेकिन जाते हुए भाजपा को और मोदी सरकार को एक बात सिखाते हुए चली गयी है, जो भविष्य के लिए सतर्क रहने की सलाह देती है.

मिडल ईस्ट नही है भरोसेमंद साथी, भारत को पश्चिमी देशो की तरफ बढ़ाना होगा झुकाव
वर्तमान में भारत मिडल ईस्ट यानी खाड़ी देशो कतर, सऊदी और ओमान आदि पर काफी अधिक निर्भर है. आज न सिर्फ अपनी आवश्यकता का अधिकतर कच्चा तेल इन देशो से आता है बल्कि भारत के स्किल्ड कामगार व अफसर भी इन देशो में रोजगार प्राप्त कर रहे है. इसके कारण से भारत इन देशो पर अच्छा खासा निर्भर हो चुका है.

अब नुपुर शर्मा केस में सरकार ने देखा है कि किस तरह से ये देश और ओआईसी जैसे संगठन अपनी बात मनवाने के लिए भारत पर दबाव बनाने लगे और भारत सरकार को कई जगहों पर सपष्टीकरण तक देने पड़ गये जो बताता है कि यहाँ इस क्षेत्र में राजनीति धर्म पर बहुत अधिक निर्भर करती है. ऐसे में भारत को यूरोप और अमेरिकी देशो की तरफ रूख करना होगा जिससे कि भारत लॉन्ग टर्म में रिलायबल पार्टनर देश प्राप्त कर सके और इस तरह के दबाव फिर से न झेलने पड़े.

अमेरिका भी झेल चुका है भरोसे का नकारात्मक परिणाम
इस तरह की स्थिति भारत के साथ नही बल्कि अमेरिका जैसे विश्व के सशक्त देश के साथ में भी हो चुकी है. जब सऊदी अरब और कई मुस्लिम देशो ने मिलकर के अमेरिका पर आयल एम्बार्गो लगा दिया था और एक तेल की बूँद भी उसे बेचने से मना कर दिया था जिसके चलते अमेरिका कुछ ही दिनों में खस्ता हाल में आ गया था. हालांकि बादमे सैन्य कार्यवाही की चेतावनी देकर के अमेरिका ने खाड़ी देशो को अपनी बात मानने पर मजबूर कर दिया था.

मगर भारत इस तरह की चेतावनी भी नही दे सकता है तो ऐसे में भारत को अन्य विकल्प खोजने होंगे जो तुलनात्मक रूप से अधिक बेहतर व लोकतांत्रिक देशो के साथ में हो. कही न कही समय अभी यही मांग कर रहा है.

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