शिवसेना और अकाली के बाद एक और दल छोड़ेगा भाजपा का साथ? मिल रहे बड़े संकेत

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भाजपा आज देश की सबसे बड़ी व सामर्थ्यवान पार्टी है इस बात में कोई भी संशय नही है. जिस तरह से वो देश के अधिकतर राज्यों के साथ में केंद्र की सत्ता पर भी अपना लगातार कब्जा जमाये हुए है उसके बाद में किसी क्षेत्रीय और छोटी पार्टी के लिये उनके साथ में जुड़ना और चुनाव लड़ना किसी फायदे से कम नही होगा. मगर अक्सर इंसान और पार्टियों की आकांक्षाएं बढती चली जाती है और इसमें वो अपने रास्ते अक्सर अलग करने के प्रयास भी करते हुए नजर आते है जो बिहार में होने की आशंका नजर आने लगी है.

नीतीश की बढ़ रही राजद नेताओं से करीबी, उठ रहे सवाल
अभी हाल ही के दिनों में जेडीयू नेता और सीएम नीतीश कुमार की राजद के नेताओं और ख़ास तौर पर लालू यादव से करीबी काफी अधिक बढ़ गयी है. हाल ही में तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने अपने सरकारी निवास पर एक इफ्तार पार्टी आयोजित की थी जिसमे नीतीश कुमार शामिल होने के लिए पहुँच गये और तब से इनका मिलना जुलना और कई चीजे आगे बढती चली जा रही है.

वही भाजपा के साथ में जदयू का जातिगत गणना के ऊपर प्रतिरोध देखने को मिल रहा है. जहाँ भाजपा इसे करवाने के पक्ष में दिखी वही सूत्रों के अनुसार इस पर जदयू का मत अलग है क्योंकि इससे कही न कही उन्हें राजनीतिक घाटे की संभावना काफी अधिक नजर आ रही है. ऐसे में कब और किस पल राजनीतिक उठापटक हो जाए कोई कुछ भविष्यवाणी नही कर सकता है.

नीतीश को अपने भविष्य की चिंता
पिछले एक दशक में नीतीश कुमार की लोकप्रियता काफी हद तक कमजोर हो चुकी है. अभी के इन दिनों में भाजपा जहाँ गठबंधन में अधिकतम सीट्स हासिल करके सरकार चलाने में सहायक बनी है वही नीतीश की पार्टी पर्याप्त सीट्स न लाकर भी सरकार में ईंजन पर एक तरह से दया के आधार पर बिठाई गयी प्रतीत होती है.

ऐसे में इतना तो जाहिर है कि अभी जो वक्त बीत रहा है उसमे भाजपा के नेता कुर्सी अपने पास लेने की कोशिश करेंगे. ऐसे में नीतीश के लिए भी अपने नए ऑप्शन तलाशने जरुरी हो जाते है मगर ये राजद के रूप में हो सकते है ये अभी के लिए कल्पना करना थोडा मुश्किल नजर आता है.

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