खोखले निकले केजरीवाल के दावे, हाईकोर्ट ने सख्ती के साथ माँगा जवाब

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अक्सर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपने राज्य यानी दिल्ली के शिक्षा मॉडल को काफी बेहतरीन बताते हुए नजर आते है और ये उनकी यूएसपी की तरह काम भी करता है. अक्सर एड से लेकर कई रैलियों में भी वो अपनी बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था की दुहाई देते दिखाई दे जाते है लेकिन जब बात जमीनी हकीकत की आती है तो फिर वहां कई मायनों में चीजे थोड़ी अलग दिखाई देती है और इस पर जब दूसरी संस्थाएं जवाब मांगते हुए दिखाई देती है तो सारी चीजे साफ़ तौर पर समझ में आने भी लगती है.

हजारो शिक्षको के पद खाली, हाई कोर्ट ने माँगा सरकार से जवाब
दिल्ली  हाई कोर्ट ने दिल्ली की सरकार से कहा है कि आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली में स्कूल में प्रधानाध्यापको के 950 में से 755 और उप प्राचार्यो के 1670 में से 418 पोस्ट खाली पड़ी है यानी बहुत ही भारी संख्या में टीचर्स की कमी है और इसी पर ही हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब करने के लिए कहा है जिस पर आगे की सुनवाई भी की जायेगी ताकि जो भी सच है वो सामने आ सके.

आपको मालूम हो तो दिल्ली हाई कोर्ट में हाल ही में एक याचिका  दायर की गयी थी जिसमे कहा गया दिल्ली सरकार दावा कर रही है हमारा शिक्षा का मॉडल सबसे अच्छा है जबकि यहाँ पर शिक्षको की भारी कमी है तो फिर ऐसा कैसे हो सकता है? ये अपने आप में बड़ा मजाक है. एक तरफ इनको स्टाफ की कमी और दूसरी तरफ ये तारीफे कर रहे है.

भाजपा भी साध रही निशाना
केजरीवाल सरकार की इस कमी और खामी को देखकर के भाजपा भी लगातार इस पर काफी अधिक अग्रेसिव होती चली जा रही है. उन्होंने तो बाकायदा पूरी मामले को काफी अधिक बढ़ा चढ़ाकर के सोशल मीडिया पर प्रचारित प्रसारित करना भी शुरू कर दिया है.

खैर अब केजरीवाल सरकार और आम आदमी पार्टी इस पूरे मुद्दे से किस तरह से निपटती है ये भी अपने आप में देखने वाली बात होगी, क्योंकि जिस तरह से शिक्षा मॉडल की यूएसपी उनके हाथ से निकल रही है वो आगे चलकर दिक्कत तो देने ही वाली है.

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