राकेश टिकैत की जिन्दगी का सबसे बुरा समय, इतने वर्षो में जो बनाया सब बिखर गया

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कभी एक दिनों में बहुत ही अधिक तेजी से चमक उठे किसान नेता राकेश टिकैत के दिन अब कुछ ख़ास अच्छे रहे नही है. एक समय में जब राकेश टिकैत चाहते थे तब उन्होंने दिल्ली को चारो तरफ से अपने संगठन के माध्यम से घेर लिया था और देखते ही देखते वो सरकार को चेलेंज करते हुए देख रहे थे. इसके बाद में जब सरकार ने कृषि क़ानून वापिस लिए तो उन्होंने खुदको ही इसका क्रेडिट देना शुरू कर दिया. खैर अब उन्होंने जितना कुछ हासिल किया था वो धीरे धीरे उनके हाथ से फिसलने लगा है.

राकेश टिकैत से छीना गया संगठन का अध्यक्ष पद, संगठन से भी निकाला
अभी हाल ही में जो मीडिया रिपोर्ट्स सामने आ रही है उसके अनुसार भारतीय किसान यूनियन के बड़े किसान नेताओं की एक बैठक आयोजित की गयी थी जो काफी अधिक लम्बी चली. इस पूरे मंथन के बाद में संगठन में दो फाड़ होते हुए नजर आये और इसी को संभालने के लिए फिलहाल के लिए राकेश टिकैत और उनके भाई नरेश टिकैत को संगठन से बाहर कर दिया गया है.

राकेश टिकैत जो कभी इस संगठन के अध्यक्ष हुआ करते थे और लाखो किसानो का नेतृत्व करते थे उनको भी पद से बाहर कर दिया गया है. हरिनाम सिंह वर्मा के आवास पर टिकैत ने किसान नेताओं को मनाने की भरपूर कोशिश की लेकिन वो सफल नही हो सके और आखिरकार हार मानकर मुजफ्फरनगर वापिस चले गये.

टिकैत पर लगे है संगठन के राजनीतिकरण करने के आरोप
संगठन के नेताओं और बाकी कई किसानो का आरोप है कि पिछले कुछ समय में राकेश टिकैत ने पूरे संगठन का राजनीतिकरण कर दिया है और इसके कारण से संगठन की छवि खराब हो रही है. विधनासभा में भी ये लोग दखलअन्दाजी कर रहे है जो बिलकुल भी सही नही है.

टिकैत और उनके करीबियों ने मिलकर के संगठन से राजनीतिक पकड़ बनाने और उसमे छेड़खानी करने की भी हर संभव कोशिश की और इसके प्रभाव न सिर्फ नेताओ के बीच बल्कि साथ ही साथ में संगठन पर भी नजर आ रहे थे. इस कारण से ये सख्त निर्णय लिया गया.

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