मनमोहन सिंह की गलतियों से सबक लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिया बड़ा फैसला

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आज रूस और यूक्रेन दोनों ही देशो के बीच में जो भी लड़ाई चली है उसका प्रभाव दोनों ही देशो के बीच से निकलकर विश्व के और भी दूसरी जगह पर भी फ़ैलने लगा है और इसका एक साइड इफ़ेक्ट अनाज की सप्लाई पर भी नजर आने लगा है क्योंकि दुनिया के अधिकतर गेहूं के उत्पादन का हिस्सा इन्ही दो देशो से आता था और कही न कही इसके कारण से दुनिया के कई देशो में अनाज की कमी पड़ने लगी है जिसकी भरपाई भारत करने लग रहा था लेकिन अब और नही हो पाएगी.

भारत सरकार ने लगाया गेहूं के निर्यात पर बैन
अभी हाल ही में भारत सरकार ने कुछ समय के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. यानी फिलहाल के लिए भारत में रहने वाले बिजनेसमेन विदेशो में गेहूं को निर्यात नही कर पायेंगे और इसके पीछे एक विशेष कारण भी है. अभी वर्तमान में भारत देश में गेहूं की कमी यूरोप से लेकर अमेरिका तक में देखने को मिल रही है और इस कारण से कई लाखो टन गेहूं भारत को निर्यात करना पड़ा है.

इसके जरिये भारत के व्यापारियों ने कई अरबो रूपये कमाए है और आगे भी इसकी डिमांड बढ़ने ही वाली है. आपको मालूम हो तो हाल ही में तुर्की भी भारत से 50 हजार टन गेहूं खरीदना चाह रहा था लेकिन अब ऐसा हो नही पायेगा क्योंकि भारत सरकार नही चाह रही है कि दूसरो को गेहूं बेचकर पैसा कमाने के चक्कर में कही अपने खुदके लिए ही न बचे.

2004 में हो चुकी है ऐसी ही घटना
इस तरह का घटनाक्रम आज से लगभग डेढ़ दशक पहले देखने को मिल चुका है जब मनमोहन सिंह की सरकार थी. उस समय दुनिया भर में गेहूं की कमी हो गयी भी और भारत ने व्यापार के जरिये दुनिया भर को खूब गेहूं बेचा और एक टाइम ऐसा आया जब भारत के पास अपनी जरूरत का गेहूं भी नही बचा और देखते ही देखते भारत को दुबारा से बाहर जाकर दुसरे देशो से इसे खरीदना पड़ा.

अब भारत सरकार नही चाहती वो गलती फिर से दोहराई जाये और इस कारण से इस तरह का निर्णय लेना पड़ा और इसके जरिये कही न कही चीजे सामान्य स्थिति में आ ही जाने वाली है.

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