उद्धव ठाकरे ने किया सोनिया गांधी का अपमान, कांग्रेस और पवार दोनों को ऐसी उम्मीद नही थी

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अभी वर्तमान में महाराष्ट्र में तीन पार्टियां मिलकर के सरकार चला रही है जिसमे कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी तीनो ही शामिल है. अब ये सभी पार्टियाँ मिलकर के अपने कार्य को कही न कही काफी बड़े स्तर पर कर भी रही है और एकजुट होने का दिखावा भी करती रही है लेकिन असल में कई मौको पर आपस में इनके मतभेद उभरकर के सामने आ ही जाते है जैसा हाल ही में हुआ और ये कही न कही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का अपमान करने के जैसा था जो थोडा अजीब भी रहा.

6 घंटे तक उद्धव का इन्तजार करते रहे पवार और सोनिया, नही दिया कोई रिस्पोंस
सोनिया गांधी अभी हाल ही में जो भी धर्म को लेकर के देश में आपसी बहस छिड़ी हुई है उसमे विपक्षी एकता को दिखाते हुए लोगो से शांत रहने की अपील करना चाह रही थी और इसमें उसने कई विपक्षी नेताओं को अपने साथ खड़ा किया. खुद शरद पवार भी उनके कहने पर आये और अब क्योंकि उद्धव ठाकरे उनके सरकार में पार्टनर है तो उनसे भी उम्मीद की गयी कि वो भी आकर के साझा बयान दे.

मगर उद्धव ठाकरे ने रिपोर्ट्स के अनुसार सोनिया गांधी की बातो पर कोई रिस्पोंस नही दिया और तो और छः घंटे तक वो और शरद पवार बस उद्धव ठाकरे का इन्तजार ही करते रहे लेकिन वो नही आये. आखिर में निराश होकर के सोनिया गांधी को उद्धव ठाकरे के बिना ही बयान जारी करना पड़ा इससे दोनों पार्टियों के बीच की दूरियां खुलकर के सामने आ गयी.

शिवसेना रखना चाहती है खुदको दूर
अभी ये जो भी धर्म के मुद्दे है जिनमे कही न कही खुदको सेक्युलर टाइप दिखाने की कोशिश की जाती है उससे शिवसेना खुदको अलग रखने की कोशिश कर रही है और ये उनके वोटर बेस के हिसाब से ठीक भी है क्योंकि शिवसेना के बनने का आधार ही हिंदुत्व और मराठावाद था जिसे छोड़कर अगर उद्धव ठाकरे पूर्णतः विपक्षी समूह में शामिल हो जाते है तो ये हैरान करने वाला ही होगा.

राज ठाकरे जिस तरह से धर्म के मुद्दे को भुना रहे है ऐसे में उद्धव ठाकरे का सोनिया गांधी को ज्वाइन कर लेना और स्टेटमेंट देना उनके लिए राजनीतिक रूप से गलत भी हो सकता था, कही न कही इस कारण से मजबूरी में ही सही लेकिन उन्हें अपने साथियो को इग्नोर करना पड़ा जो अपमान के रूप में ही देखा गया है.

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