इंग्लैंड को मोदी की हर हाल में मदद चाहिए, वरना बड़ी दिक्कत हो जायेगी

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अभी भारत की स्ट्रेटजिक ताकत दुनिया भर में काफी अधिक तेजी के साथ में बढ़ी है और ये बात हम लोग काफी अच्छे से जानते भी है. कही न कही जो कुछ भी हुआ है उसे देखते हुए एक बात तो कह ही सकते है कि मोदी सरकार की डिप्लोमेसी काफी अधिक शक्तिशाली हो गयी है और इसी कारण से आज विश्व के कई विकसित राष्ट्रों के लिए भी भारत काफ़ी हद तक मददगार साबित हो रहा है. अभी इंग्लैंड ने भी ख़ास कारण के चलते हुए भारत से मदद की उम्मीद लगा रहा है.

मोरिशस के साथ आईलैंड विवाद में है ब्रिटेन
ये मामला शुरू होता है कई दशको पहले जब मोरिशस ब्रिटेन का उपनिवेश हुआ करता था. जब इस देश ने ब्रिटेन से आजादी की तो उससे पहले ब्रिटेन ने इसके एक हिस्से को अलग कर दिया था और उसे अपनी समुद्र पार का क्षेत्र घोषित कर दिया, इसे हम लोग आज के समय में डिएगो ग्रेसिया आइलैंड के नाम से जानते है. आज की तारीख में ब्रिटेन ने ये आईलैंड अमेरिका को लीज पर दे रखा है और अमेरिका इस क्षेत्र में मिलिट्री बेस बनाकर के रह रहा है.

ये आईलैंड भारतीय महासागर में पड़ता है जिसके कारण से अमेरिकन नौसेना अपनी उपस्थिति के जरिये चीनी नौसेना को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकती है. मगर मोरिशस का कहना है कि ये जो कुछ भी हो रहा है वो गलत है. ब्रिटेन को हमें ये आईलैंड वापिस करना होगा और इसे लेकर के मोरिशस हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जाकर के गुटबाजी कर रहा है और ब्रिटेन पर दबाव बना रहा है उसकी आलोचना की जा रही है.

अब भारत आयेंगे ब्रिटेन के प्रधान मंत्री, चाहते है मदद
मोरिशस पर भारत का प्रभाव किसी से छुपा  हुआ नही है. आज भारत के कहे अनुसार वहाँ की सरकार कई सारे फैसले लेती है और इस कारण से ब्रिटेन चाहता है कि भारत इस मामले में कुछ हद तक सहायता करे और इस मामले को सुलझाने में आगे आये.

कई स्ट्रेटजिक एक्सपर्ट मानते है कि भारत संभवतः कुछ मिलियन डॉलर की डील के जरिये दोनों देशो के बीच में भविष्य में मामला सेटल करवाने की कोशिश आकर सकता है, ताकि कोई भी नाराज न हो और भारत की भी अपनी महत्ता दोनों देशो के लिए बनी रहे.

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