अमित शाह अब चाहते है देश में एक और बड़ा बदलाव, कांग्रेस न करने देने पर अड़ी

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मोदी और शाह की जोड़ी ने जब से राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा है तब से वो कई ऐसे बड़े बदलाव करते हुए नजर आ रहे है जो अपने आप में बहुत ही अधिक ख़ास भी होता है. अभी के लिहाज से देखा जाए तो शाह ने 370 हटाने जैसे कई बड़े निर्णय लिए है और उनकी आकांक्षाएं और भी काफी कुछ करने की है जो कई मायनों में हमें देश के लिहाज से जरुरी भी लगता है. उनके हाल ही के बयान में हमें ऐसा ही कुछ नजर आ भी रहा है.

शाह चाहते है, इंग्लिश का विकल्प हिंदी बने
अभी हाल ही की बात है जब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब लोगो से संवाद कर रहे थे तो उन्होंने कहा कि अब वो समय आ चुका है जब राजभाषा को देश की एकता का अंग बनाया जाये. जब अलग अलग राज्य के लोग आपस में एक दुसरे से बात करते है तो ये अपनी भाषा में होना चाहिए. जब तक हम लोग स्थानीय भाषा के शब्दों को स्वीकार कर के हिंदी को लचीला नही बनाते है तब तक ये मुश्किल है.

यहाँ पर शाह साफ़ तौर पर अपने एजेंडे को लोगो के बीच में रखते हुए नजर आये है जहाँ पर वो देश भर में हिंदी को मुख्य भाषा के रूप में प्रमोट करना चाह रहे थे. हालांकि भाजपा तो लम्बे समय से ये बात कहते हुए भी आ रही है कि अन्य भाषाओं के सम्मान के साथ में हिंदी को और अधिक प्रचलित बनाया जाना चाहिए ताकि अलग अलग राज्यों के लोग आपस में एक दुसरे से निर्बाध बातचीत कर सके.

विरोधी पार्टियां उठाने लगी स्वर
अमित शाह का ये बयान सामने आते ही क्षेत्रीय भाषाओं के हिमायती कांग्रेस, टीएमसी और शिवसेना आदि ने इसके विरोध में बाते बोलनी शुरू कर दी और शाह की आलोचना कर दी है. जाहिर तौर पर इनके विरोध के चलते हुए हिंदी को मुख्य राजभाषा के रूप में प्रमोट करना बहुत ही अधिक मुश्किल होने वाला है.

हालांकि देश की आबादी का एक बहुत ही बड़ा हिस्सा है जो हिंदी बोलता है और कही न कही इस कारण से बहुत ही बड़ी जनसँख्या ऐसी भी है जो उनका समर्थन भी कर रही है.

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