नवरात्रि में मांसाहार खाने से रोकने पर ओवैसी ने बड़ी बात बोल दी है

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अभी वर्तमान में जिस तरह के हालात और स्थिति देश में बने है उसने कही न कही दो पक्षों को जन्म दिया है. एक तरफ वो लोग है जो कही न कही सरकार के समर्थन में खड़े नजर आते है तो दूसरी तरफ वो भी है जो हर पक्ष में बिना किसी तर्क के सरकार के विरोध में खड़े हो जाते है. ऐसे ही लोगो में एक व्यक्ति ओवैसी भी है जो अभी वर्तमान में नवरात्रि पर जो लोगो को मांसाहार करने या फिर बेचने करने से रोके जाने की घटनाएं आदि आ रही थी उस पर बोले है.

देश आस्था के हिसाब से चलेगा या फिर संविधान
जब एएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद के क्षेत्रीय नेता असुसुद्दीन ओवैसी से मांसाहार न करने से रोक को लेकर कई बार तर्क वितर्क हुए थे तो उन्होंने कहा कि अगर देश आस्था के अनुसार ही चलना है तो फिर रमजान के दिनों में भी सराब को बंद कर दीजिये. मुझे आप ये बताइए कि देश क़ानून के हिसाब से चलेगा या फिर आस्था के हिसाब से? कौन ये तय करेगा कि किसे कब गोश्त खाना है और कब नही.

मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने ये भी कहा कि अब धीरे धीरे क़ानून का शासन समाप्त होता जा रहा है. मुस्लिमो को दबाकर के रखो उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बना दो यही सब हो रहा है और साजिश के तहत हो रहा है. आपने किसी का घर तोड़ दिया अब किससे शिकायत करे? इससे आपको ख़ुशी मिलती है किसी गरीब का मकान तोडके.

आप लोग कौन होते है? आखिर जज, पुलिस और कोर्ट किसलिए है? आप लोग खुद ही पुलिस जूरी और कोर्ट बन जायेंगे और किसी का घर गिरा देंगे. आपने कोई नोटिस नही दिया न ही कोई क़ानून है ऐसा, किसके तहत आप ऐसा कर रहे है? ओवैसी की बातो में उनकी खिन्नता को साफ़ तौर पर देखा जा सकता है.

जेएनयू की केन्टीन से बढ़ा मामला
देश के कई स्थानों पर प्रशासन ने नवरात्रि पर मांसाहार बेचने करने पर प्रतिबन्ध लगाये थे और फिर जेएनयू के केन्टीन में भी इसी मुद्दे को लेकर आपस में एबीवीपी और लेफ्ट के छात्र भिड गये थे और फिर देश भर में इस मामले को लेकर के चर्चाएँ देखने को भी मिली.

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