मोदी दुनिया भर में बेचना चाहते है भारत का गेहूं और चावल, लेकिन एक आदमी की वजह से नही हो पा रहा

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आज भारत के पास में विश्व की सबसे बेहतरीन और उपजाऊ जमीनों में से एक है और ये बात लगभग हर कोई जानता है. गंगा जैसी नदियों के किनारे उगने वाले गेहूं और चावल से किसान इतने अधिक समृद्ध हो चुके है कि आज न सिर्फ भारत अपने देश के लोगो का पेट काफी आराम से भर पाता है बल्कि साथ ही साथ में विश्व के अधिकतर आबादी के लोगो को भी एक्स्पोर्ट कर सकता है. मगर वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन के नियमो के चलते हुए ऐसा हो नही पा रहा है.

पीएम मोदी ने खुद कहा, डब्लूटीओ भारत के किसानो और व्यापारियों को विदेशो में अनाज पहुंचाने दे
अभी हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री इस मामले को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडन और वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन के सामने भी उठा चुके है और कह चुके है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही देशो से अभी दुनिया भर में अनाज की सप्लाई बंद है और ऐसे में कई देशो में अनाज की कमी से लोगो की जान तक जा सकती है. ऐसे में भारत को अनाज की सप्लाई से रोका नही जाना चाहिए.

इस वर्ष भारत में मानसून भी सही समय पर आने की भविष्यवाणी की गयी है इस कारण से मोदी सरकार विश्व में अनाज के फुल एक्सपोर्ट को लेकर काफी अधिक आशान्वित है. आपको मालूम हो तो भारत ने हाल ही में 50 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट तो अनाज का कर भी दिया है मगर अब ऐसा हो नही पा रहा है जिसके पीछे का कारण है अंतर्राष्ट्रीय नियम.

भारत सरकार द्वारा किसानो को दी जाने वाली सब्सिडी है कारण
भारत विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है और उसके नियमो का व्यापार के समय पालन करता है. इस संगठन के नियमो के अनुसार अगर कोई देश अपने किसानो को अधिक मात्रा में सब्सिडी प्रदान करता है तो वो देश बहुत बड़े स्तर पर अनाज का निर्यात नही कर सकता है क्योंकि छोटे देश अपने किसानो को सब्सिडी नही दे सकते और वो निर्यात में पीछे रह जायेंगे.

अगर भारत निर्यात करना चाहता है तो उसे अपने किसानो को दी जाने वाली सब्सिडी कम करनी होगी जो वर्तमान परिपेक्ष में संभव नही है. अब ऐसे में जाहिर सी बात है कि भारत को अपने लिए नियमो में छूट की डिमांड करनी होगी ताकि अब दुनिया के लोगो को गेहूं का निर्यात और अधिक मात्रा में किया जा सके.

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