भारत के सामने खड़ा है सबसे बड़ा संकट, प्रधानमंत्री मोदी को भी चेताया गया

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आज मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत काफी अच्छी खासी प्रगति कर रहा है और चीजे कुछ हद तक बेहतर भी हो रही है. अगर हम लोग सही मायने में देखते है तो ये बात हम लोग काफी अधिक अच्छे से समझते भी है. मगर हर जगह पर कुछ अच्छे पॉइंट होते है तो कुछ एक ऐसी बाते भी होती है जो भविष्य को लेकर के संकट जारी करती है और अभी राजनीतिक पार्टियों के द्वारा एक जो जनता को मुफ्त में बांटने व वोट बटोरने वाली नीति अपनायी जा रही है वो अपने आप में काफी अधिक बुरी साबित हो रही है.

मोदी सरकार से बोले वरिष्ठ अफसर, श्रीलंका जैसे हो सकते है हालात
अभी हाल ही में मोदी सरकार ने एक उच्च स्तरीय मीटिंग बुलाई थी जिसमे देश भर के सबसे टॉप सीनियर अधिकारी शामिल हुए थे जो देश को चलाने का कार्य करते है. इन नौकरशाहों ने अपनी तरफ से मोदी सरकार को चेताया कि जो अभी ये लोकलुभावन फ्री बांटने वाली योजनाएं कई राज्यों में सरकारे चला रही है वो आगे चलकर चिंता का सबब बन सकती है.

इसके कारण से न सिर्फ राज्यों का कर्ज जीडीपी की तुलना में काफ़ी अधिक बढ़ जाएगा बल्कि उनकी कर्ज चुकाने की क्षमता भी एक तरह से समाप्त हो सकती है. इससे कही न कही मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी, ट्रांसपोर्ट, सफाई आदि की गुणवत्ता गिरेगी क्योंकि सारा पैसा तो मुफ्त का सामान बांटने में निकल जाता है. ऐसे में श्रीलंका जैसी स्थिति भी आ सकती है.

दिल्ली समेत और कई राज्य दे रहे मुफ्त चीजे
जहाँ एक तरफ दिल्ली में मुफ्त बिजली जैसी स्कीम्स चल रही है तो कई राज्य मुफ्त में फोन और लैपटॉप तक बाँट रहे है जिनका उद्देश्य कही न कही आने वाले वक्त में अपने लिए वोट बैंक को मजबूत करना नजर आता है और इस चक्कर में कही न कही देश की इकॉनमी लगातार खराब हो रही है.

अब संभव है इसके कारण से कही न कही भारत की अर्थव्यवस्था के ऊपर नकारात्मक असर पड़ने लगे. हो सकता है इसे देखते हुए केंद्र सरकार इस तरह की फ्री की योजनाओं को रोकने के लिए अपनी तरफ से कदम उठाने भी शुरू कर दे.

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