चीन ने भेजा अजित डोभाल को अपने यहाँ आने का न्योता, बदले में मिला ऐसा जवाब

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अभी फिलहाल में भारत और चीन दोनों ही देशो के रिश्ते कुछ ज्यादा ख़ास अच्छे नही है और ये बात हम बहुत ही अच्छे तरीके से जानते है. पहले तो सिर्फ दोनों ही देशो के बीच में स्पर्धा चला करती थी लेकिन अभी की बात अगर हम करते है तो फिलहाल में दोनों देशो के बीच में गलवान घाटी में हुई घटना के बाद में दूरियां बढ़ चुकी है. अब चीन लगातार कोशिश कर रहा है कि भारत थोडा सॉफ्ट हो जाए लेकिन ऐसा कुछ हो नही रहा है. डोभाल के बयान से तो ऐसा ही लगता है.

चीनी विदेश मंत्री भारत पहुंचे थे, डोभाल को दिया आने का न्योता
चीन के विदेश मंत्री खास तौर पर अभी हाल ही में भारत के दौरे पर आये थे. वांग यी को भारत ने निमंत्रित नही किया था वो अपनी तरफ से खुद ही चलकर आये और आकर के अपने समकक्ष एस जयशंकर से मुलाक़ात भी की. इसके बाद में उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बातचीत करने के बाद में उन्हें अपने देश यानी चीन में आने का न्योता दिया है.

डोभाल अभी नही जायेंगे, सीमा पर शान्ति हो तभी बनेगी
बात भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न करने की बात को दर्शाते हुए एक तरीके से चीन के प्रस्ताव को शान्ति न होने तक के लिए मना ही कर दिया है. वेंग यी को जवाब देते हुए डोवल साहब कहते है कि जब चीन और भारत के बीच में मुद्दे सुलझ जायेंगे तब वो चीन जरुर आयेंगे, यानी उससे पहले आने का तो कोई विचार ही नही है.

आगे भारत की तरफ से कहा गया कि बॉर्डर के जो भी बचा हुआ क्षेत्र है वहाँ से भी सेना को हटाया जाना चाहिए और जब तक ऐसा नही होता है तब तक द्विपक्षीय शान्ति भी नही हो सकती है. जरूरी है कि दोनों ही देश एक दिशा में काम करे और जो मामले रह रहे है उन्हें जल्दी से सुलझाया जाये.

कुल मिलाकर अजित डोभाल और एस जयशंकर दोनों ही चीन को लेकर के काफी अधिक सख्त है और ये आम तौर पर देखने में आता रहा है. पहली बार ऐसा हुआ है जब चीन का कोई इतना बड़ा व्यक्ति जो जिनपिंग के बादमें दुसरे नम्बर का बड़ा नेता है उसे भारत में इतना मामूली स्वागत मिला हो और कोई ख़ास तरजीह नही दी गयी. ये भारत की डिप्लोमेसी को दर्शाता है.

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