जिनपिंग को महसूस हुई अपनी गलती, अब मोदी से करना चाहते है दोस्ती उठाया बड़ा कदम

0
1597

चीन और भारत के बीच में पिछले लम्बे समय से काफी अधिक गतिरोध चल रहा है और ये हम लोग भी बहुत ही अच्छे तरीके से देख ही रहे है. गलवान घाटी में जो कुछ भी हुआ था उसके बाद में तो चीजे और ज्यादा बिगड़ गयी और दोनों देशो के सम्बन्ध इस हद तक खराब हो गये कि दोनों देशो के नेता आपस में किसी फोरम पर भी बमुश्किल ही मिल रहे थे. मगर एक बात तो है कि भारत जैसे विशाल देश को आप ज्यादा समय तक नजरअंदाज नही कर सकते है और ये अभी हाल ही में देखा गया है.

चीन ने खुद सामने से आग्रह कर भारत में अपने विदेश मंत्री को भेजा, संबंधो को बेहतर करने की कोशिश
चीन की तरफ से खुद ही अभी हाल ही में भारत की सरकार को एक स्पेशल रिक्वेस्ट भेजी गयी थी जिसमे कहा गया कि उनके विदेश मंत्री वांग येन भारत दौरे पर आना चाहते है. भारत ने भी बड़ा दिल दिखाते हुए एक बार के लिए उनके आगमन को मंजूर कर लिया और अभी हाल ही में चीनी विदेश मंत्री भारत में पहुंचे है.

भारत आकर के उन्होंने अपने समकक्ष भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाक़ात की है. हालांकि भारत ने चीनी विदेश मंत्री को यहाँ पर भी साफ़ शब्दों में कहा है कि पहले भारत चीन सीमा पर पूर्ण रूप से शान्ति हो और चीन की सेना पीछे हटे उसके बाद में ही आगे कुछ और हो सकता है. चीन भी इस बात पर अब थोडा झुकता हुआ प्रतीत हो रहा है.

विश्व अर्थव्यवस्था में चीन को पड़ रही भारत की जरूरत
आज दुनिया में दो गुट बन चुके है जिसमे से एक में चीन व रूस है जबकि दूसरी तरफ अमेरिका व यूरोप है. चीन चाह रहा है कि भारत उनका साथ दे और उनकी मुद्रा का इस्तेमाल तेल आदि खरीदने में करे. अगर भारत ऐसा कर देता है तो चीन की मुद्रा डॉलर के बराबर की ग्लोबल करेंसी बन जायेगी.

मगर जाहिर सी बात है चीज के मक्खन लगाने के बाद भी भारत चीन की किसी भी तरह की स्ट्रेटजिक मदद करने के लिए हां नही भरने वाला है क्योंकि इससे आखिर में भारत के लिए ही नुकसान हो सकता है और इस कारण से भारत क्वाड का हिस्सा भी बना हुआ है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here