बड़ी खबर: स्कूल कॉलेजो में हिजाब पहनने पर हाई कोर्ट ने दे दिया अपना अंतिम फैसला

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अभी हम कई महीनों से एक मामले को अपने बीच में उठते हुए देख रहे है जो एक पब्लिक आर्डर और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच में चल रहे संघर्ष के बारे में बताता है और कही न कही ये बहुत ही ज्यादा चिंताजनक स्थिति को भी दर्शाता है इस बात में कोई भी संशय नही है. दरअसल कर्नाटक के उड़पी में कॉलेज में हिजाब पहनने की जिद को लेकर मुस्लिम लडकियों ने प्रदर्शन किया था. जिस पर कॉलेज ने मना कर दिया था और ये मामला राष्ट्रीय स्तर पर उठा दिया गया और फिर ये हाई कोर्ट में चला गया.

कोर्ट ने हिजाब पर रोक को रखा बरकरार, कहा ये कोई आवश्यक प्रैक्टिस नही
कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले में सरकार व कॉलेज की बातो को सही मानते हुए मुस्लिम लडकियों की दलीलों को खारिच कर दिया है, जिसके अनुसार उन्हें हिजाब पहनना मजहब के अनुसार जरूरी प्रैक्टिस कहा जा रहा था. कोर्ट ने कहा कि पूरी सुनवाई के बाद में माना जा सकता है कि हिजाब पहनना आपके मजहब में कोई आवश्यक प्रैक्टिस के रूप में नही है.

इस कारण से स्कूल ड्रेस कोड का जो नियम है वो मुस्लिम लडकियों को पालन करना होगा और इसी कारण से एक तरह से स्कूल कॉलेजो में हिजाब को पहनने के ऊपर रोक बरकरार रहेगी. कही न कही ये बहुत ही बड़ा और बेंचमार्क निर्णय माना जा रहा है जिससे कई लोग खुश है तो कुछ लोग नाराज भी दिखाई दे रहे है.

कोर्ट का निर्णय मूल अधिकारों का उल्लंघन नही
विपक्ष से जुड़े लोग इसे मूल अधिकारों का उल्लंघन बता रहे है जबकि कोर्ट की विवेचनाओ की माने तो ये मूल अधिकार निरंकुश नही होते है पब्लिक आर्डर को मेंटेन करने के लिए कुछ पाबंदियां जरूरी हो जाती है जैसे हर व्यक्ति को कही भी घूमने और स्वच्छंद तरीके से आने जाने का अधिकार तो है लेकिन जब लॉकडाउन लगाना पड़ा तो उस समय घर में बंद भी रखा गया.

इसका अर्थ ये नही हुआ कि लोगो के घूमने फिरने के अधिकारों को ही समाप्त कर दिया गया. इस कारण से ये माना गया कि हर किसी को आज भी धर्म को अपनी इच्छा अनुसार मानने और प्रैक्टिस करने का अधिकार है लेकिन ये चीज स्कूल के ड्रेस कोड के साथ में शिक्षण संस्थाओं में विवादित नही बननी चाहिए.

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