भारत ‘विश्व मुद्रा संचालन’ का किंग बन सकता है, मोदी सरकार ने इसकी शुरुआत कर दी है

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आज भारत एक उभरती हुई इकॉनमी है जिसके पास में वो शक्ति है जिसे अनुभव करना ही कई लोगो के लिए कई देशो के लिए एक स्वप्न के जैसा है. खैर अगर हम लोग अभी की बात करते है तो फिलहाल के लिए भारत जल्द से जल्द डिजिटल इकॉनमी में प्रवेश कर रहा है और आज की तारीख में भारत विश्व में डिजिटल इकॉनमी में टॉप करते हुए भी नजर आ रहा है क्योंकि हमारी पब्लिक सेक्टर कम्पनी एनपीसीआई ने डेवेलोप किया है ‘यूपीआई’. जो दुनिया में किसी भी और देश के पास में नही है.

विश्व का सबसे तेज, रियल टाइम और सुरक्षित डिजिटल लेन देन का माध्यम बन चुका है यूपीआई
आज भारत सरकार की कम्पनी एनपीसीआई के द्वारा बनाया हुआ पेमेंट प्लेटफॉर्म यूपीआई दिन ब दिन नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार अभी हाल ही में यूपीआई ने पिछले वर्ष में 900 बिलियन डॉलर से भी अधिक का आदान प्रदान किया है जो भारत की जीडीपी का लगभग एक तिहाई है. वही विश्व में भी हम यूपीआई के कारण डिजिटल लेन देन के कुल आंकड़ो में नम्बर एक पर पहुँच रहे है.

विदेशो में फैलेगा यूपीआई, नेपाल से हुई शुरुआत
अभी हाल ही में एनपीसीआई ने एक सब्सिडरी कम्पनी ओपन की है जिसका मकसद होगा यूपीआई पेमेंट सिस्टम को विदेशो में स्थापित करना और अभी हाल ही में नेपाल में इसकी शुरुआत कर दी गयी है. इसके बाद में यूरोप और अमेरिकी देशो में इसको एक्सपोर्ट करने की कोशिश की जायेगी क्योंकि आज भी ये देश कार्ड और चेक पेमेंट सिस्टम पर ही निर्भर कर रहे है.

ऐसे में भारत का यूपीआई विश्व को रियल टाइम पेमेंट सिस्टम के रूप में एक बड़े उपहार के रूप में नजर आ रहा है. कई सीनियर इकोनॉमिस्ट तो ये तक अनुमान लगा रहे है कि यूपीआई में क्षमता इतनी अधिक है कि ये दशको से चले आ रहे स्विफ्ट पेमेंट सिस्टम की जगह भी ले सकता है जो दो देशो के बीच में मुद्रा के आदान प्रदान में प्रमुख भूमिका निभाता है.

यानी आज भारत के पास में यूपीआई इकोसिस्टम के रूप में एक टेक्नोलॉजी की बढ़त है और इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो आगे चलकर के ये पेमेंट इंटरफेस दुनिया में धन के आदान प्रदान को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा. भारत में तो ये फोन पे, गूगल पे और पेटीएम आदि के साथ मिलकर लोगो के जीवन में परिवर्तन ला ही रहा है.

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