मोदी ने चीन के खिलाफ बड़ा निर्णय लिया, रूस के नाराज होने की भी परवाह नही की

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भारत आज के समय में बहुत ही अधिक विशेष तरह की विदेश नीति को फॉलो कर रहा है जहाँ पर किसी के भी दबाव में काम करने की बजाय अपने हिसाब से नीतियाँ बना रहा है और कही न कही ये बात तो हम लोग भी बहुत ही अधिक अच्छे से समझ पा रहे है कि अब पहले वाली न्यूट्रल नीति नही बची है. अगर आपको मालूम हो तो हाल ही में विंटर ओलंपिक्स को लेकर के भारत ने अपना स्टैंड काफी अधिक शानदार तरीके से बदल दिया है और इसके पीछे कारण भी है.

गलवान में मौजूद रहे चीनी सैनिक को बनाया गया ओलम्पिक की टोर्च का वाहक
अभी हाल ही में आपको पता हो तो चीन में कुछ ही दिनों में विंटर ओलम्पिक शुरू होने जा रहे है और इससे पहले जो समूह ओलम्पिक की टोर्च लेकर के चलता है उसमे एक वाहक चीन का सैनिक था और ये सैनिक वो था जो गलवान घाटी में हुई घटना में शामिल था. इस पूरे घटनाक्रम के माध्यम से चीन ने अपने उस सैनिक को दुनिया के सामने हीरो बनाने की कोशिश की और पूरे खेल समारोह का राजनीतिकरण कर दिया.

भारत ने कर दिया खेल का राजनयिक बहिष्कार, रूस को खुश करने के लिए पहले कर रहा था सपोर्ट
आपको पता हो तो पहले से ही अमेरिका और उसके साथी देश चीन के विंटर ओलंपिक्स के खेलो का डिप्लोमेटिक बहिष्कार कर चुके है. वो चाहते थे कि भारत भी ऐसा करे लेकिन रूस के तरफ थोडा प्रेम दिखाते हुए भारत ने पहले तो तय किया था कि चलो हम चीन के खेलो में हिस्सा ले लेंगे.

मगर हाल ही में हुई इस टोर्च वाली घटना ने कही न कही मोदी को नाराज कर दिया है. इसके बाद में विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चीन में हो रहे विंटर ओलंपिक्स का राजनयिक बहिष्कार कर दिया है और एक तरह से अमेरिका के साथ में भारत चला गया है जहाँ पर जाहिर तौर पर रूस को बुरा लगेगा लेकिन भारत के लिए अपना आत्मसम्मान सबसे पहले है.

हालांकि पाक और कई देश है जो खुलकर के चीन का इस मामले में सपोर्ट कर रहे है तो जाहिर सी बात है कि भारत को तो इससे आज नही तो कल बाहर जाना ही था. कही न कही ये बहुत ही बढ़िया कदम उठाया गया है और विश्व समुदाय इसकी सराहना करने जा रहा है.

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