चीन को दोहरी स्पीड से पीछे धकेल रहा भारत, श्रीलंका और नेपाल में मोदी ने कर दिया कमाल

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भारत आज एशिया में एक बहुत ही बड़ी और मजबूत ताकत के रूप में उभर चुका है और ये बात हम भी बहुत ही अधिक अच्छे से जानते है कि चीन को अगर कोई देश वाकई में चुनौती पेश करने वाली स्थिति में है तो वो अकेला भारत ही है. इस कारण से भारत और चीन दोनों में ही एशिया के अलग अलग देशो के ऊपर प्रभाव जमाने की होड़ मची हुई है. पिछले कुछ वक्त से चीन भारी पड़ रहा था लेकिन भारत ने बदलते हुए वक्त के साथ में कई पॉइंट्स के साथ में बढ़त हासिल कर ली है.

नेपाल में चीन की मदद से बने पॉवर प्लांट्स से बिजली नही खरीदेगा भारत, अनाधिकारिक रूप से खबर आयी बाहर
अभी हाल ही में नेपाल के कई अधिकारी और वहाँ के मीडिया रिपोर्ट्स ने ये दावा किया है कि भारत ने अनाधिकारिक रूप से उनसे कहा है कि नेपाल में हाइड्रो पॉवर प्लांट्स की मदद से जो बिजली का उत्पादन होता है वो भारत तभी खरीदेगा जब वो भारत के, नेपाल के या फिर गैर चीनी इन्वेस्टमेंट से बने होंगे.

इस डर से अब नेपाल ने चीन को अपने पॉवर सेक्टर से धीरे धीरे दूर करना शुरू कर दिया है. दरअसल नेपाल ये एक ख़ास एम्बिशन लेकर के बैठा है कि यहाँ पर बहने वाली विभिन्न नदियों से ये कई गीगा वाट बिजली का उत्पादन करे और उसका एक्सपोर्ट भारत व भूटान को बेचकर के कई बिलियन डॉलर कमाए. भारत ने नेपाल की इसी नब्ज को पकडकर इसके बदले में उसे चीनी निवेश से दूर होने के लिए कहा है और वाकई में नेपाल दूर होता हुआ दिख भी रहा है.

श्रीलंका में पहले ही भारत चीन को धकेलना शुरू कर चुका है
अगर हम बात करे श्रीलंका की तो हाल ही में भारत ने श्रीलंका को कई मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद पहुंचाकर के इसे संकट से उबार दिया है जो इस देश पर चीनी कर्ज के कार्रन से आ रहा था. यही नही भारत अब श्रीलंका में पोर्ट आदि भी बना रहा है व चीन को काउंटर कर रहा है ताकि छोटे छोटे देश कही जिनपिंग के चेले चपाटे न बन जाये.

श्रीलंका के राजदूत ने तो भारत को अपना सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मित्र बता दिया है और ये अब तब हो रहा है जब चीन इस देश को अपने बस में करने की कोशिश कर रहा है. भारत के लिए अपने स्ट्रेटजिक इंटरेस्ट मजबूत करने के नजरिये से फ़िलहाल श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और मालदीव को चीन के प्रभाव से दूर रखना जरूरी भी है.

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