योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या से क्यों नही लड़ा चुनाव, राम मंदिर के पुजारी ने बताया

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योगी आदित्यनाथ आज के समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफी बड़ा और महत्त्वपूर्ण चेहरा बन चुके है. उनका होना ही हमें काफी कुछ बता देता है कि भाजपा किस तरह से यूपी की राजनीति में दिन दोगुनी और रात चौगुनी रफ़्तार से प्रगति कर रही है और कही न कही ये चीज काफी अधिक ख़ास भी है. खैर जो भी है कई लोग उम्मीद कर रहे थे कि योगी इस बार अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे और भाजपा की चुनाव समिति में इस पर बात भी हुई लेकिन ऐसा नही हुआ.

राम लला के पुजारी ने बताया, विस्थापन के कारण विरोध हो सकता था
अभी हाल ही में इस मामले में राम लला के मुख्य पुजारी श्री दास ने कहा कि ये अच्छा है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार अयोध्या की जगह गोरखपुर से चुनाव में उतर रहे है, मेने ही उन्हें ऐसा करने का सुझाव दिया था. हम तो जो कुछ भी बोलते है वो राम लला को पूछकर के ही बोलते है और इस बात पर यहाँ के साधू एकमत नही है.

विकास की परियोजनाओं के कारण से जिन लोगो के घर तोड़े गये है वो लोग अभी योगी के खिलाफ है, जिन लोगो की दुकाने गिरी है वो भी उनके खिलाफ है और कह रहे है ये योगी आदित्यनाथ का काम है, दूरगामी रूप से ये काफी  बड़ी योजनाएं है और इससे लाभ होगा लेकिन अभी लोग समझ नही पा रहे है और विरोध हो सकता है. इस कारण से अगर वो यहाँ पर चुनाव जीत भी जाते तो भी उनको समास्याओ का सामना करना पड़ता.

गोरखपुर है सबसे सुरक्षित सीट
अभी के लिए जब योगी आदित्यनाथ जी के लिए सबसे अधिक सुरक्षित सीट की बात आती है तो फिर वो गोरखपुर क्षेत्र ही माना गया है क्योंकि वो लगातार यहाँ से सांसद रहे है और इस क्षेत्र में उनको चुनौती देने वाला और कोई समकक्ष नेता भी नही रहा है तो इस कारण से जाहिर तौर पर उन्हें ये विधानसभा सीट सौंपी गयी है.

कही न कही जो कुछ भी हुआ है उसे देखते हुए इतना तो कह ही सकते है कि यूपी के चुनाव आने वाले समय में सही मायनों में काफी अधिक रोचक और ख़ास होने वाले है और उसका केन्द्रीकरण तो योगी आदित्यनाथ पर ही होने जा रहा है.

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