शी जिनपिंग ने आज पूरे विश्व के सामने पीएम मोदी को चेलेंज किया, अब आगे क्या होगा

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जब भी बात आती है डिप्लोमेसी की तो उसमे प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे अधिक तेज और बेमिसाल नेताओं में शुमार किये जाते है और ये बात किसी से भी छुपी हुई नही है. मगर इसके कारण से चीन को काफी अधिक दिक्कत होते हुए देखी जाती रही है और ये बात हम लोग भी बहुत ही अधिक अच्छे से जानते है. खैर जो भी है अगर हम लोग अभी की बात करते है तो हाल ही में सेंट्रल एशियन देशो को लेकर के दोनों ही देशो के बीच में एक तरह से रेस होते हुए देखी जा रही है और जिनपिंग ने आज बड़ा कदम भी चला है.

भारत ने 26 जनवरी को किया है पांचो देशो को आमंत्रित
सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि ये सेंट्रल एशिया के पांच देश है कौनसे? ये देश है कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान. इन पांचो देशो के राष्ट्राध्यक्षो को भारत ने 26 जनवरी पर आमंत्रित किया है जिस पर ये लोग संभवतः वर्चुअली ही हिस्सा बनेंगे. इसका मकसद ये था कि भारत का प्रभाव इन देशो में बढे क्योंकि ये देश एशिया में व्यापार के नजरिये से और आयल आदि की दृष्टि से भी काफी ख़ास है.

चीन ने भारत से एक दिन पहले पांचो देशो को अपने साथ मीटिंग में बुलाया, जिनपिंग ने की बात
जब भारत की मीटिंग फिक्स हुई तो अचानक से ही चीन को भी इन पांचो देशो की याद आ गयी और जिनपिंग ने इन पांचो देशो को चीन के साथ में डिप्लोमेटिक सम्बन्ध के 30 वर्ष पूरे होने पर समिट आयोजित कर बुला लिया. इसने सबको हैरान किया क्योंकि ये सब कुछ चीन ने अचानक से किया और भारत के इन देशो को आमन्त्रण देने के बाद में किया.

जाहिर तौर पर इससे जिनपिंग ने पीएम मोदी को चेलेंज करने की कोशिश की है कि जिन केन्द्रीय एशियाई देशो पर भारत अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा है उनको हम पहले ही प्रभावित कर चुके है. कही न कही ये बहुत ही बड़ी बात है कि भारत के लिए चीन हर मौके पर आकर के चुनौती बन रहा है.

ये मामला सिर्फ इसी जगह पर ही नही रूकता है. चीन और भारत के बीच में प्रभुत्व जमाने की लड़ाई श्रीलंका, आफ्रीकी देशो और साउथ अमेरिकी देशो में भी चल रही है और ऐसे में आगे चलकर के इसके परिणाम कितने बेहतर निकलते है ये तो आने वाला वक्त ही बता सकेगा.

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