मोदी सरकार बदलने जा रही है बड़ा नियम, जिससे ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे नाराज हो गये है

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सरकारे कही न कही अपने हिसाब से चीजो को बदलती रहती है और वही करने की कोशिश करती है जिससे कि उनके फायदे का काम हो सके और अधिक शक्ति को केन्द्रित किया जा सके, खैर कही न कही ये चीज जरूरी भी है वरना शासन के आदेश कौन मानेगा? अब इसी कड़ी में मोदी सरकार एक बड़ा नियम पारित करने जा रही है जो राज्यों की शक्ति को काफी हद तक कम कर देगा और केंद्र के हाथ में वो पॉवर दे देगा जो एडमिनिस्टर करने के लिए सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है.

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अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने एक प्रस्ताव पारित किया है और इसे राज्य सरकारों को भी भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि केंद्र में अभी आईएएस अधिकारियों की कमी है जिसके चलते इस क़ानून के नियम 6 में बदलाव किया जाएगा. अगर ये पारित हो जाता है तो फिर अधिकारियों की नियुक्ति से जुडी हुई सारी शक्ति राज्य सरकार के हाथो से निकलकर के केंद्र सरकार के पास में चली जायेगी.

यानी अगर कल को केंद्र सरकार किसी भी राज्य सरकार में लगे हुए आईएएस अधिकारी की कही और नियुक्ति करना चाहे, उसे दिल्ली तलब करना चाहे या फिर उसका ट्रांसफर आदि करना चाहे तो फिर उसे राज्य सरकार की सहमती की आवश्यकता नही पड़ेगी. अधिकतर राज्यो ने इसका समर्थन किया है लेकिन बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्य इसके विरोध में उतर गये है.

ममता पर केंद्र लगा चुका है अधिकारियों से मिलीभगत के आरोप
अभी आपको मालूम हो तो केंद्र सरकार में बैठी हुई भाजपा बंगाल में तैनात अधिकारियों और वहाँ की राज्य सरकार पर तमाम तरह के आरोप लगाती रही है और कुछ समय पहले की ही बात है जब अलपन बंधोपाध्याय जो ममता के करीबी आईएएस अधिकारी माने जाते रहे है, उनको मोदी सरकार ने दिल्ली आने का आदेश दिया था लेकिन ममता सरकार के पॉवर के कारण उनको वो बुला नही पाए.

कुल मिलाकर के इससे विरोधी पार्टियों की सरकारों को काफी दिक्कत होने वाली है क्योंकि अगर कल को केंद्र को महाराष्ट्र में बैठे हुए किसी अधिकारी से दिक्कत होती है तो वो उसका तबादला कर सकते है और उसमे वहां की राज्य सरकार कुछ भी कर नही पाएगी.

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