श्रीलंका को मोदी ने भेजी आपातकालीन मदद, नही भेजते तो पूरा देश बर्बादी में चला जाता

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अभी आज भारत एशिया में एक न सिर्फ बड़ी महाशक्ति बनकर के उभरा है बल्कि साथ ही साथ में सबसे बड़ी बात यहाँ पर ये भी हो जाती है कि जब कोई देश इतना ताकतवर होता है तो फिर आस पास के छोटे मोटे देशो से जुडी हुई कई जिम्मेदारियां भी बिना मांगे ऊपर आन पडती है और अभी फ़िलहाल श्रीलंका के मामले में भी ऐसा ही कुछ होते हुए नजर आ रहा है जो अपने आप में काफी हद तक अपेक्षित भी था. दरअसल श्रीलंका अभी बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है.

श्रीलंका के पास नही था एक और दिन भी बिजली उत्पादित करने का पैसा, भारत में भेजी 500 मिलियन डॉलर की त्वरित मदद
आपको पता हो तो श्रीलंका अभी कर्ज के तले दबा हुआ है और इसके फोरेक्स रिजर्व लगभग खत्म ही हो चुके है और ऐसे में श्रीलंका को न सिर्फ अपना कई बिलियन डॉलर का कर्ज चुकाना है बल्कि अपने देश को भी चलाते रहना है, लेकिन अब इनके पास में पैसा नही है. 17 जनवरी को हालात ये थे कि इनके पास में अगले दिन को बिजली उत्पादित करने के लिए भी पैसा उपलब्ध नही हो रहा था.

भारत को इन्होने पहले ही रिक्वेस्ट भेज रखी थी जिस आधार पर अभी हाल ही में हिन्दुस्तान की सरकार ने श्रीलंका को 500 मिलियन डॉलर की मदद भेजी है जिससे फ़िलहाल के लिए श्रीलंका में आने वाला पॉवर का संकट रूक गया है. अगर किसी देश में बिजली न हो तो वो देश पूरा ठप्प हो जाएगा और पाषाण काल में चला जाएगा. अभी के लिए कम से कम ये चीज रुकी हुई है.

भारत के लिए बढ़ रही मुश्किलें, आगे भी चाहिए इस देश को मदद
श्रीलंका की मुसीबते यहाँ पर भी कम नही हो रही है, इस वर्ष श्रीलंका को 6 बिलियन से अधिक का कर्ज चुकाना है जिसमे से अधिकतर पैसा चीन को जाना है और काफी पैसा बांड्स का भी चुकाना है. अब ऐसे में अगर श्रीलंका अपना लोन चुकाने में नाकाम हो जाता है तो संभव है आने वाले वक्त में चीन श्रीलंका पर और भी कई पोर्ट्स और एयरपोर्ट आदि लीज पर 99 साल के लिए ले ले.

भारत के लिए ये स्ट्रेटजिक रूप से काफी बुरा है क्योंकि चीन श्रीलंका के जरिये भारत को घेरने की कोशिश करेगा और ऐसे में मजबूरी में भारत को श्रीलंका की इस दबाव भरे आर्थिक दौर में मदद करनी पड़ रही है. संभव है भविष्य में भारत जापान और यूके देशो के साथ सम्मिलित रूप से प्रयास कर श्रीलंका को इस आर्थिक मुश्किल के दौर से निकलने में मदद  करे.

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