UAE को अब भारत की तुरंत मदद की जरूरत है, क्या मोदी करेंगे सहायता

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भारत ने बीते दशक में मिडल ईस्ट में अपनी एक महत्त्वपूर्ण पहचान बनाई है और ये काफी अधिक सशक्त बात भी है. ख़ास तौर पर जब भारतीय गल्फ देशो की तरफ देखते है तो फिर UAE एक ऐसे देश के तौर पर सामने आता है जिसके साथ में भारत का ट्रेड और भारत के डिप्लोमेटिक सम्बन्ध काफी अधिक अच्छे है. आज ये देश काफी अधिक तेजी से प्रगति कर रहा है लेकिन अब इसके ऊपर ग्रहण लगते हुए नजर आ रहा है अभी हाल ही में खबर तो ऐसी ही आ रही है.

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में जा सकता है यूएई, आ सकता है आर्थिक संकट
अभी विभिन्न रिपोर्ट्स के हवाले से ये खबर आ रही है कि आने वाले वर्ष में यूएई के ऊपर जांच हो सकती है और इसके बाद में एफएटीएफ द्वारा एक्शन लेते हुए इस देश को ग्रे लिस्ट में डाला जा सकता है. ऐसा होने पर दुबई की करेंसी की वैल्यू गिर सकती है और इससे यहाँ पर फाइनेंसियल दिक्कते खड़ी हो सकती है.

जब भी किसी देश को ग्रे लिस्ट में डाला जाता है तो वहाँ का व्यापार यानी आयात निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है. निवेशक भी उस देश में पैसा इन्वेस्ट करने से बचते है और कही न कही वो देश गरीबी की तरफ जाने लगता है. हाल ही में पाक और तुकी को ग्रे लिस्ट में डाला गया था जिसके बाद से इनकी करेंसी की वैल्यू निम्न स्तर पर जा चुकी है. यूएई को मनी लांड्रिंग में सहयोगी देश होने के आरोप लगने के कारण ऐसा कहा रहा है क्योंकि यहाँ पर टैक्स कम है.

भारत और अमेरिका जैसे सहयोगी देश ही कर सकते है मदद
अब ऐसे समय में भारत, अमेरिका और इजरायल जैसे देश ही है जो अपने डिप्लोमेटिक पॉवर की मदद से यूएई को इस लिस्ट में जाने से बचा सकते है. सूत्र बताते है कि अभी इस बात को लेकर के चर्चा शुरू भी हो चुकी है कि यूएई अपने मित्र देशो को अप्रोच करना शुरू करे और खुदको इस लिस्ट में जाने से बचा ले.

खैर ये तो अब भारत पर भी निर्भर करता है कि भारत जब एफएटीएफ की मीटिंग्स आदि होती है तो वहाँ पर अपनी तरफ से क्या कुछ ओपिनियन रखता है? खैर दुबई जैसी जगह का इस लिस्ट से बाहर होना भारत के लिए फायदे से भरा है तो संभव है भारत यूएई की मदद कर दे.

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