सरकार ने सरकारी बैंको को लेकर बड़ा निर्णय कर लिया है

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आज के समय में बैंकिंग अपने आप में बहुत ही अधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है और ये बात तो हम लोग भी बहुत ही अधिक अच्छे से जानते है. कही न कही सरकारी बैंक जब से देश आजाद हुआ है तब से ही काम पर इस मामले में तो लगे ही हुए है और अगर बात की जाये अभी के लिहाज से तो अब इनमे समय के साथ में बदलाव की एक जरूरत महसूस हो रही है जो करना कही न कही जरुरी भी है और वो वो जरूरत है निजीकरण की.

बैंको से अपनी हिस्सेदारी घटाएगी सरकार, लेकिन नियुक्ति के अधिकार रखेगी
अभी तक के लिए अगर हम लोग बात करे तो सरकारी बैंको में सरकार की खुदकी न्यूनतम हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत होती थी, इससे कम वो नही रख सकती थी क्योंकि क़ानून ही इस तरह का हुआ करता था, मगर अब इसे समय के साथ में बदलने की जरूरत महसूस हुई है तो फिर इस कारण से इसे बदलने के ऊपर काम भी किया जा रहा है.

अभी की जो मीडिया रिपोर्ट्स है वो हमें ये बताती है कि सरकार अपनी हिस्सेदारी को सरकारी बैंक्स में 51 प्रतिशत से कम करके पूरे 26 प्रतिशतपर लाया जा रहा है और ये अपने आप में बहुत ही बड़ी बात है क्योंकि इससे सरकार को कई लाखो करोडो रूपये का मुनाफ़ा होगा लेकिन इससे सरकारी क्षेत्र में निजी प्लेयरो की हिस्सेदारी काफी अधिक बढ़ जायेगी.  हालांकि सरकार प्रबंधन में नियुक्ति का अधिकार अपने पास में ही रखने वाली है और ये अपने आप में की पॉइंट होगा.

कर्मचारियों में है नाराजगी
जाहिर तौर पर निजी क्षेत्र की भागीदारी अगर बैंको में बढ़ेगी तो सरकारी कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना जन्म लेगी और ऐसा होने पर आने वाले समय में चीजे कही न कही बिगड़ने की संभावना भी  काफी अधिक रहती है और ये कई बैंक कर्मचारियों द्वारा इसके खिलाफ जताए गये विरोध में नजर भी आता है.

मगर अभी इसे लेकर के जैसा सरकार का रूख नजर आ रहा है उससे एक अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है कि फ़िलहाल के लिए मोदी सरकार एक बार के लिए इस बिल को पास करवाने के मूड में

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