बिपिन रावत के निधन के बाद में एक ऐसा राज खुला है, जो सरकार को सोचने पर मजबूर कर देगा

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देश के सबसे बड़े सुरक्षा सैन्य अधिकारी बिपिन रावत के निधन के बाद में जो कुछ भी घटित हुआ है वो अपने आप में काफी अधिक तकलीफ भरा और लोगो को दुखी करने वाला है. इसके कारण से लोग भी काफी अधिक चिंतित हुए है और अभी के लिए ये बात सोचने वाली है कि आखिर देश में लगातार इस तरह की घटनाएं क्यों हुई है? जनरल रावत के निधन से पहले भी कई बार हेलीकॉप्टर गिरने की घटनाएं हुई है लेकिन वो पहले प्रकाश में  नही आयी थी पर अब आयी है.

भारतीय सेना और एयरफाॅर्स के पास आज पर्याप्त आधुनिक हेलीकॉप्टर की है कमी, ज्यादातर है दशको पुराने
भारत के पास में आज के समय में सबसे पहली जरूरत ये है कि वो बूढ़े हो चुके अपने 320 हेलीकॉप्टर को तुरंत रिप्लेस कर दे क्योंकि वो आज के समय में डीकमीशन करने की हालत में पहुँच चुके है. आज भारत के पास में लगभग 70 प्रतिशत हेलीकॉप्टर की फ्लीट 3 दशक से भी अधिक पुरानी है और बची हुई 30 प्रतिशत फ्लीट हेलीकाप्टर तो 50 साल से भी अधिक पुराने हो चुके है.

आज की तारीख में भारत की सेना में और एयरफ़ोर्स में सबसे अधिक चलने वाले चेतक और चीता चॉपर भी बहुत अधिक अच्छी हालत में नही है और इसके कारण से कई बुरी घटनाएं भी देखने में आती रहती है. पिछले एक दशक में भारत ने कुल 19 जवानो को इन हेलीकॉप्टरो की खस्ता हालत के कारण से अपनी जान गंवाई है और अब इनको रिप्लेस करने की जरूरत महसूस होती है.

जनरल रावत के साथ हुई घटना के बाद भारत सरकार गंभीर, जल्द नये हेलीकॉप्टर खरीदे जायेंगे
जनरल रावत के साथ में जो घटना हुई है उससे अब एक बात जगजाहिर हो चुकी है कि पुरानी टेक्नोलॉजी पर आधारित हेलीकॉप्टर उड़ाने का समय और दौर अब जा चुका है और भारत को चाहिए कि नयी टेक से लैस विमान आदि खरीदे जाए.

इस कारण से भारत ने रूस के साथ में एक बिलियन डॉलर की डील भी कैंसिल कर दी है और सीधे डायरेक्ट परचेज करने की बात कही है जो भारत में सेना और एयरफ़ोर्स के लिए तुरंत प्रभाव से नए हेलीकॉप्टरो की कमी पूर्ति हेतु कारगर रहेंगे.

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