मुझे नैतिकता का पाठ पढ़ाना बंद करो, जो तुमने किया वो हम भी करेंगे, गरजते हुए बोले मोदी

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अभी आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के एक बड़े विजनरी नेता के तौर पर जाने जाते है और उनकी पहचान भी बहुत ही बड़ी है इस बात में कोई भी संशय नही है. मगर देश को आगे ले जाने की कोशिश में उनको कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है और इसके कारण से आज एक संबोधन के दौरान उनका गुस्सा जमकर के बाहर निकला है और उन्होंने कुछ एक विशेष देशो को बिना नाम लिए टारगेट किया है जो भारत को पर्यावरण को लेकर ज्ञान देते हुए नजर आते है.

भारत के इंडस्ट्रियल विकास में आड़े आ रहे कई विकसित देश, दे रहे क्लाइमेट चेंज का हवाला
अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ शब्दों में कहा है कि कहने को तो आज सब देश आजाद हो चुके है लेकिन बड़े बड़े कई देश आज भी अपने कोलोनिअल माइंडसेट में ही जी रहे है. वो ये समझते है कि हम आपको बतायेंगे आपको कैसे विकसित होना है? जिन रास्तो पर चलकर के इन्होने खुद ने विकास किया और आज इस मुकाम पर पहुंचे है उस मुकाम पर पहुँचने से भारत जैसे देशो को नैतिकता का पाठ पढाकर के रोकने की कोशिश की जा रही है लेकिन ऐसा नही होगा.

कोयले से ऊर्जा उत्पादन जैसे मामलो और ग्रीन ऊर्जा को लेकर बढ़ रहे दबाव को लेकर है इशारा
दरअसल इन दिनों में विश्व के कई देश है जो भारत और चीन पर काफी अधिक दबाव बना रहे है कि हम तेजी से अपनी ऊर्जा का उत्पादन कोयले जैसे पदार्थो से शिफ्ट करके ग्रीन एनर्जी पर तुरंत चले जाए जो कि फ़िलहाल के लिए संभव नही है क्योंकि भारत के पास में अभी उतना बजट नही है.

ऐसे में एक बात तो इतिहास भी जानता है कि यूरोप हो या फिर अमेरिका हो आज ये सारे देश और महाद्वीप कही न कही कोयले जैसे पदार्थो द्वारा ऊर्जा उत्पादन के द्वारा ही इस मुकाम पर पहुंचे है और आज भारत को पर्यावरण का हवाला देकर के ये रोकने की कोशिश करना और पेरिस क्लाइमेट अग्रीमेंट जैसी चीजे थोपना अपने आप में चिंता वाली बात है. सरकार को इस कारण से काफी अधिक जूझना भी पड़ता है.

एनजीओ के माध्यम से भी बनाया जाता है दबाव
अभी भारत में हजारो करोड़ रूपये की फंडिंग विदेशो से कई एनजीओ को आती है और ये सरकार के कई प्रोजेक्ट्स में पर्यावरण के हवाले दे देकर के वहां पर प्रोटेस्ट करते है, कोर्ट में मामला ले जाते है जिससे कही न कही बहुत सारे प्रोजेक्ट लम्बे अटके रह जाते है.

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