आखिरकार टूट गया ममता बनर्जी का अहंकार, बदल ली अपनी नीति

0
14889

ममता बनर्जी एक बहुत ही अधिक सख्त नेता के तौर पर जानी जाती है और ये बात तो हम लोग भी बहुत ही अच्छे तरीके से जानते है क्योंकि जिस तरह से ममता दीदी ने भाजपा के विजय रथ को बंगाल में घुसने से रोका उसके बाद में उनका अकड दिखाना तो बनता ही है, मगर ये सब कुछ तब तक ही अच्छा लगता है जब तक कि जेब में पैसा हो क्योंकि जब जेब में पैसा नही रहता तो फिर धीरे धीरे करके आपको झुकना ही पड़ता है. इन दिनों बंगाल सरकार की स्थिति भी कुछ ऐसी ही होते हुए नजर आ रही है.

पहले केंद्र सरकार की योजनाओं को रोककर अपनी योजना चलाती थी ममता सरकार, अब पैसे नही बच रहे तो दिखा रही नरमी
अभी तक जो भी केंद्र की योजनाएं चला करती है जिससे लोगो का भला हो सके उनको राज्यों में आने से किसी न किसी तरह से ममता सरकार रोक लेती थी. उदाहरण के तौर पर आयुष्मान भारत योजना जिसके तहत लोगो को स्वास्थ्य कवरेज मिलता है उसकी जगह पर सत्य साथी प्रोकल्पो योजना चला दी, ऐसी कई योजनाओं की लिस्ट है.

अब ये सब कुछ चालू तो कर दिया लेकिन इनका खर्चा इतना महँगा पड़ रहा है कि राज्य सरकार के पास में बजट की खींचतान चालू हो गयी है और ऐसे में अब उन्हें केंद्र की तरफ रूख करना पड़ा है क्योंकि किसी भी राज्य सरकार की भी एक हैसियत होती है जिससे आगे वो बढ़ नही सकती.

जल्द ही केंद्र की कई योजनाएं बंगाल में चलते दिखेगी
पीएम मोदी के फेस के साथ में संभव है आने वाले वक्त में जल्द ही बंगाल में कई योजनाए चलती हुई नजर आये जो ममता सरकार ने एक तरह से अप्रत्यक्ष रूप से चलने से रोक रखी थी और इससे बंगाल में उनका प्रभाव भी बढेगा इसमें कोई दो राय नही है.

मगर इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि बंगाल सरकार को अनुभव होने लगा है कि केंद्र की मदद के बिना राज्य और उनकी सरकार कभी भी लम्बे समय तक चल नही सकती है और ये एक कभी भी न झुठलाया जा सकने वाला सत्य है जिसे जितना जल्दी समझा जा सके उतना जल्दी समझ लेना चाहिए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here