तुर्की को पाकिस्तान का साथ करना पड़ गया भारी, पड़ गया है बड़ी मुसीबत में

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2001

आज के समय में तुर्की एक ऐसा देश है जो हर मौके पर कही न कही पाक की मदद करता है और चाहे सामरिक मामले हो या फिर राजनैतिक मामले हो सब जगह पर उसके साथ में आकर के खड़ा हो जाता है. तुर्की की डिप्लोमेटिक पॉवर अब तक काफी अधिक मजबूत थी लेकिन हाल ही में तुर्की के साथ में जो हुआ है वो उसे उसी जगह पर लाकर के खड़ा कर देने वाला है जिस जगह पर आज की तारीख में पाकिस्तान खुद खड़ा हुआ है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था की हालत खराब होने जा रही है.

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में डाला गया तुर्की, स्टॉक मार्किट गिरी और तुर्की की मुद्रा निचले स्तर पर
अभी हाल ही में एफएटीएफ यानी फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स जो काफी मजबूत अंतर्राष्ट्रीय विभिन्न देशो का संगठन है उसने तुर्की के खिलाफ एक्शन लेते हुए उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया है. इसका असर ऐसा हुआ है कि इस देश का शेयर मार्केट गिर चुका है और तुर्की की मुद्रा भी कमजोर पड़ चुकी है जिससे पता चलता है कि इस देश की अर्थव्यवस्था का काल आने वाला है.

दरअसल जब भी कोई भी देश एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में डाला जाता है तो फिर उस देश को कही से भी आसानी से विकास के लिए लोन नही मिलते, देश की रेपुटेशन गिर जाती है, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करने में कई व्यवधान पैदा हो जाते है और कई जगहों पर नजरअंदाज किया जाता है. इस कारण से उस देश की हालत बद से बदतर होती चली जाती है और ये एक तरह की सजा होती है जो एफएटीएफ गलत काम करने वाले देशो को देती है.

तुर्की पर लगे है कई गंभीर आरोप
अभी के लिए तुर्की को ग्रे लिस्ट में डालने के पीछे का कारण बताया गया है कि ये देश कई जगहों पर आतक को बढ़ावा दे रहा है, यही नही उनको पैसा दे रहा है फाइनेंस भी कर हर है यानी उनको आर्थिक मदद दे रहा है जिससे विश्व में अर्थव्यवस्था में अस्थिरता देखने को मिली है. कुल मिलाकर के जो काम करने के आरोप पाक पर लगे है वैसे ही आरोप तुर्की पर लगे है.

इसके दूरगामी प्रभाव काफी बुरे होंगे जिससे तुर्की की अर्थव्यवस्था हिल सकती है और यहाँ की सरकार को रूटीन खर्चे चलाने के लिए भी काफी अधिक मेहनत लगने वाली है. हालांकि ये लोग अब ग्रे लिस्ट से खुदको बाहर निकालने के लिए भी कोशिश करने में लग चुके है.

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