मोदी ने अब अफगानिस्तान में अपना असली खेल शुरू कर दिया है

0
14998

प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से ही अपनी शानदार डिप्लोमेसी के लिए जाने जाते है और ये कही न कही जरुरी भी है कि कोई भी देश का पीएम और वहां की सरकार और अधिक बेहतर तरीके से काम करे और विदेश ओमे अपने प्रभाव को बेहतर करके रखे. अभी के लिए अफगानिस्तान में ऐसा ही कुछ करने की जरूरत महसूस हो भी रही है क्योंकि जिस तरह से वहाँ से अचानक से लोकतांत्रिक सरकार चली गयी है वो अपने आप में थोडा चिन्तादायी तो है मगर इस पर भी भारत को थोडा तेज होना  पड़ेगा.

20 अक्टूबर को मोस्को मीटिंग में, फिर अपनी भी एक कांफ्रेंस आयोजित करने जा रहा भारत
अभी भारत ने निर्णय किया है कि वो इस 20 अक्टूबर को रूस में अफगानिस्तान में जो मीटिंग होने जा रही है उसका हिस्सा बनेगा और वहां पर अपने मित्र देशो के साथ में मिलकर के अपना पक्ष रखेगा ताकि अभी अफगानिस्तान में एक इन्क्लूजिव सरकार की वापसी हो सके. इसके बाद में भारत ने नवम्बर में एक कांफ्रेंस भी आयोजित की है जिसमे चीन और पाक तक को भी आमंत्रित किया गया है.

इनके जरिये भारत ने निर्णय किया है कि ये चीन और रूस जैसे देशो के साथ मिलकर के उनके साथ अपने साथ साधे जाने वाले हित जैसे इरान में इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स और अफगानिस्तान की जमीन से अपनी तरफ आने वाली अस्थिरता रोकने जैसे मुद्दों पर सहमती बनाएगा और इससे तालिबान पर दबाव बनाने की कोशिश की जायेगी कि वो कुछ अन्य संगठनों के लोगो को भी सरकार में ले.

अगर ऐसा हो जाता है तो फिर भारत अपना कम से कम अभी के लिये अफगानिस्तान की जमीन को भारत के खिलाफ होने से रोक पायेगा और अभी के लिए इससे अधिक बेहतर स्थिति हो नही सकती है मगर इसके लिए भी भारत को काफी अधिक लम्बी पारी खेलनी पड़ेगी और उसके लिए मोदी सरकार काम कर रही है.

हालांकि पहले की लोकतांत्रिक सरकार जितनी उम्मीद तो अब तालिबान से नही की जा सकती है लेकिन फिर भी कुछ हद तक कोशिशे तो हो ही सकती है जिसके माध्यम से चीजे थोड़ी बेहतर हो सके.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here