पंजाब की राजनीति में आया अजीब मोड़, कुछ दिन पहले सिद्धू ने दिया था इस्तीफ़ा और अब

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पंजाब राज्य की राजनीति दिन ब दिन बहुत ही ज्यादा रोचक होती चली जा रही है और यहाँ पर कई ऐसे फैसले और नेताओं के बयान देखने में आ रहे है जिसकी कुछ समय पहले तो किसी ने अपेक्षा भी नही की थी. जैसा कि आप जानते ही होंगे कि किस तरह से अमरिंदर सिंह ने पहले मुख्यमंत्री पद छोड़ा और उसके बाद में कांग्रेस पार्टी ही छोड़ दी. इसके बाद में सिद्धू ने भी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दिया था और इस पर चर्चे काफी जोर शोर से हो रहे थे.

18 दिन बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने वापिस ले लिया अपना इस्तीफ़ा
पूरे लगभग ढाई हफ्तों की रस्सा कशी के बाद में आखिरकार नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना इस्तीफा वापिस ले लिया है और अब ये फिक्स हो गया है कि कम से कम फ़िलहाल के लिए तो वो कांग्रेस पार्टी में ही बने रहने वाले है. नवजोत सिंह सिद्धू राहुल गांधी से मिले थे और इस मुलाक़ात के बाद में सब कुछ देखते ही देखते सामान्य हो गया और उन्होंने अपना इस्तीफा वापिस ले लिया.

इसके बाद में मीडिया से बातचीत में सिद्धू ने कहा कि मेरी जो भी चिंताएं थी मेने सब कुछ राहुल गांधी जी के साथ में साझा कर दी और उन्होंने सबका समाधान निकाल दिया. राहुल जी से मिलने के बाद में सब कुछ ठीक हो गया है. यानी कैप्टेन साहब तो पार्टी से बाहर जा चुके है लेकिन अब सिद्धू पाजी पार्टी में ही रहेंगे और शायद वो किसी तरह से सीएम पद तक पहुँचने के सपने के बारे में भी सोच ही ले.

अभी के लिए कांग्रेस में शान्ति, मगर हाई कमान पर शंका जारी
हालांकि अभी के लिए पंजाब कांग्रेस में किसी तरह से शान्ति कर दी गयी है लेकिन ये भला कब तक रहेगी? क्योंकि ये आम तौर  पर अक्सर ही देखने में आता रहा है कि जब कभी भी क्षेत्रीय मजबूत नेता विरोध या फिर विद्रोह पर उतर आते है तो सीनियर वरिष्ठ नेताओं के पास में कोई फुल प्रूफ प्लान होता ही नही है.

ऐसे में दिखाई तो साफ़ तौर पर पड़ता है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी कही न कही विजन की कमी से जूझ रही है और उसकी पूर्ती के लिए नयी लीडरशिप की जरूरत भी महसूस पार्टी के कई नेताओं को होते हुए नजर आ रही है.

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