जिस नेता पर मोदी शाह ने सबसे ज्यादा भरोसा किया और मंत्री बनाया, वो विरोधी पार्टी में जा मिला

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राजनीति अपने आप में फायदे का  खेल है. यहाँ पर विचारधारा और अपनापन अक्सर छोटा पड जाता है जब आपका फायदा या फिर आपका निजी हित कही पर अधिक बड़ा हो. ऐसा ही हर पार्टी के साथ में होता है और इस कारण से हम पार्टियों में देखते है कि वैचारिक स्थिति के आधार पार्टी ज्वाइन करने वाले नेता आपको बहुत ही कम मिलते है. हाल ही के एक बड़े उदाहरण को ले लीजिये जिसके कारण से पूरे भाजपा के लोग सकते में है क्योंकि हुआ ही कुछ ऐसा है.

बाबुल सुप्रियो ने ज्वाइन की टीएमसी, मोदी सरकार में बनाया था केन्द्रीय मंत्री
आपको मालूम हो तो जब बंगाल के चुनाव होने थे उससे पहले कई बड़े बड़े नेता भाजपा ज्वाइन हुए थे जिनमे से एक बाबुल सुप्रियो का नाम भी था. बाबुल पर मोदी और शाह ने बंगाल को लेकर के काफी अधिक भरोसा किया और उनकी बतायी हुई नीतियों के आधार पर ही चुनाव कही न कही लड़ा भी गया था लेकिन भाजपा ये चुनाव जीत नही सकी. हारने के कुछ ही दिनों के बाद में बाबुल सुप्रियो ने भाजपा छोड़ने का ऐलान किया था.

आज उन्होंने घोषणा कर दी है कि वो तृणमूल कांग्रेस यानी ममता बनर्जी की पार्टी में वापसी कर रहे है. पहले इस बात को लेकर के शक था कि ममता उनको फिर से अपनाएगी लेकिन शायद उनकी तरफ से मिली हरी झंडी के बाद में ही उनको वापिस अपने खेमे में ले लिया गया है. इस तरह से भाजपा का अपना एक और बड़ा नेता जिसे उन्होंने मंत्री पद से लेकर मान सम्मान सब कुछ दिया वो फिर से ममता दीदी के पास चला गया है.

अब पश्चिम बंगाल में भाजपा और अधिक कमजोर होगी
बाबुल सुप्रियो के चले जाने से भारतीय जनता पार्टी की स्ट्रेटजी, पार्टी की कई अंदरूनी बाते और काफी कुछ है जो टीएमसी वालो के हाथ लगेगा और इससे कही न कही स्ट्रेटजिक रूप से ममता बनर्जी की पार्टी को बल मिलने वाला है.

सोशल मीडिया पर इस कदम के बाद में लोग बाबुल सुप्रियो कोए मौक़ा परस्त जैसे नामो से भी बुला रहे है मगर खैर अब जो भी है इस तरह की चीजे राजनीति में अक्सर देखने में आती ही रहती है.

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