फ्रांस की अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से लड़ाई हो गयी, बोला दोनों ने मिलकर धोखा दिया

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अभी विश्व में कुछ एक ही बड़ी शक्तियां है और वो एकजुट आ रही है लेकिन अपने देश के इंटरेस्ट भी तो सबसे पहले रखने होते है. मगर बात की जाए अभी की तो इन दिनों में फ़्रांस के अपने ही मित्र देशो के साथ में सम्बन्ध थोड़े खराब हो गये है और इसके पीछे का कारण है पैसा. रूपया एक ऐसी चीज है जो भाई भाई में झगडा करवा दे ये तो फिर भी मीलो दूर बैठे हुए देश है. इस पूरे झगडे की बिसात आज से करीबन पांच वर्ष पहले ही बिछ गयी थी.

ऑस्ट्रेलिया लेना चाहता था सबमरीन, फ्रांस के साथ सौदे को लेकर चल रही थी बात
ऑस्ट्रेलिया अपने सीमाओं की सुरक्षा के लिए एडवांस और शानदार सबमरीन लेना चाहता था क्योंकि उसकी मौजूदा सबमरीन खराब और पुरानी टाइप की हो गयी है. पहले ऑस्ट्रेलिया इस डील को लेकर फ्रांस की डिफेन्स कम्पनी नेवल शिप के पास में गया और उनसे सबमरीन की खरीद की बात की. इसको लेकर के लगभग चार पांच साल बात चली. फ्रांस की इस कम्पनी ने अपने प्रोडक्ट दिखाने करने में ही कई मिलियन डॉलर खर्च कर दिए.

अब पांच वर्ष बीतने के बाद में ये बात लगभग तय ही था कि ऑस्ट्रेलिया अपने सबमरीन के आर्डर फ्रांस को देगा और ये कोई छोटी मोटी नही बल्कि 70 बिलियन डॉलर की डील थी यानी भारत के एक पूरे साल के रक्षा बजट के बराबर की डील. मगर यहाँ पर फ्रांस का कहना था कि आपका काम काफी बड़ा है तो आपको डिलीवरी 2032 तक हो पाएगी क्योंकि आप इसके निर्माण में कुछ मदद कर नही सकते. इसी को लेकर के बस निगोशीएट हो रहा था.

अब अचानक अमेरिका और ब्रिटेन से कर ली ऑस्ट्रलिया ने डील, फ्रांस हो गया नाराज
अब हाल ही में खबर आयी कि ये सबमरीन वाली डील ऑस्ट्रलिया ने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ में कर ली है यानी फ्रांस के कई मिलियन डॉलर बर्बाद करने के बाद में उन्होंने ये 70 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट अमेरिका को सौंप दिया है और सबसे बड़ी बात ये फ्रांस को इस बात की भनक तक नही थी कि ऐसा कुछ होने जा रहा है?

इस कारण से जब ये खबर बाहर आयी तो फ्रांस के राष्ट्रपति ने खुद अपने कडवे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि हमारे साथ में आप लोगो ने धोखा किया है. कोई भी मित्र देश एक दुसरे के साथ में ऐसा नही करता है ऐसा लग रहा है जैसे पीठ में छुरा किया गया है. ऑस्ट्रेलिया ने आज हमारा भरोसा खो दिया है.

हालांकि भारत को इससे काफी फायदा होगा क्योंकि आज जब ऑस्ट्रेलिया फ्रांस का डिफेन्स बायर नही है तो सबसे बड़ा खरीदार भारत ही बचता है जो राफेल जैसे विमान खरीदता है और भारत आगे भी कई चीजो में रुचि दिखा रहा है. ऐसे में फ्रांस का झुकाव भारत की तरफ निकट भविष्य में काफी अधिक होने वाला है.

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