मोदी सरकार बेचेगी देश की सबसे मशहूर और बड़ी सरकारी कम्पनी, खरीदने को तैयार हुए टाटा

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अभी के लिए हम लोग जानते है कि मोदी सरकार निजीकरण के काफी अधिक पक्ष में नजर आ रही है. कही न कही इसके पीछे कारण भी है. जिस तरह से सरकारी कम्पनियां लगातार घाटे में जा रही थी उसके बाद में उनको प्राइवेट प्लेयर के हाथ में देकर के ही बचाया जा सकता है क्योंकि अगर ये लगातार लोस ही देती रही तो फिर फायदा कैसे होगा? इस सम्बन्ध में एक और बड़ी कम्पनी है जो जल्द ही टाटा के नाम पर हो सकती है और आप शायद उसका नाम जानते भी होंगे.

एयर इंडिया बिकने को तैयार, टाटा ग्रुप ने लगा दी है बोली
अभी हाल ही में एयर इंडिया बिकने के लिए तैयार हो गयी है. इसके लिए पहले भी बोलियाँ आमंत्रित की गयी थी लेकिन पिछली बार कोई भी खरीदार नही आये थे. इस बार दो खरीदार पहले तो स्पाइसजेट के चेयरमेन और दूसरा टाटा ग्रुप है. ये दोनों में ही इन दिनों में बोली लग रही है और ज्यादा पॉवर फ़िलहाल साफ़ तौर पर टाटा के पास में नजर आ रही है जिसके चलते जल्द ही ये टाटा के हाथ में जा सकती है.

पहले भी कई बार हुई बेचने की कोशिश, मगर कर्ज के कारण कोई खरीद नही रहा था
दरअसल पहले भी इस एयर इंडिया को बेचने की सरकार ने काफी कोशिश की थी लेकिन इस एयर लाइन पर लगभग 60 हजार करोड़ का कर्ज है और सरकार ने शर्त रखी थी कि जो खरीदेगा वो ही इस कर्ज को भी चुकाएगा तो इस कारण से कोई इसे खरीद नही रहा था. अब नयी शर्त ये रखी गयी है कि खरीदार चाहे जितना कर्ज अपने ऊपर ले सकता है और बाकी के लिए कुछ और व्यवस्था की जायेगी. इस नयी शर्त पर टाटा ग्रुप और स्पाइस जेट के चेयरमेन इस कम्पनी को खरीदने को तैयार हुए है.

इसी के साथ में ये अब लगभग तय ही माना जा रहा है कि सरकार इसे बेच देगी क्योंकि एयर इंडिया को चलाने में देश का सरकारी खजाना खूब अधिक खर्च हो रहा था और अगर इस पैसे को सही जगह पर लगाया जाए तो अधिक विकास हो सकता है बजाय कि एक एयर लाइन के सिस्टम को ठीक करने में इसे खपाया जाए.

आपको वैसे जानकर के आश्चर्य होगा कि इस एयर इंडिया को शुरू टाटा ग्रुप ने ही किया था जिसे सरकार ने एक्वायर कर लिया था और ये नेहरु के समय की बात है. फिर कई दशको तक ये सरकार के पास में रही मगर अब इसे बेचा जा रहा है क्योंकि ये अपने आप में काफी महँगी साबित हो रही है.

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