अमेरिका ने भारत को किया इशारा, मांग रहा वो चीज जो उसे शायद ही मिले

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आज के समय में चाहे अमेरिका भारत से हजारो मील दूर है लेकिन फिर भी दोनों ही देश एक मजबूत डिफेन्स पार्टनर के रूप में जाने जाते है और इस कारण से एक बात तो हम समझ ही पा रहे है कि जब कभी भी जरूरत पड़ेगी तो उस समय में भारत की मदद अमेरिका मांगेगा. अभी हाल ही में अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंथनी ब्लिंकेन ने तो इस बारे में काफी बड़ा बयान दिया है जो थोडा सा चकित भी करता है और भारत व अमेरिका की बढ़ रही नजदीकियों की तरफ इशारा भी करता है.

अफगानिस्तान को कण्ट्रोल करने के लिए भारत की मदद चाहता है अमेरिका, एंथनी ब्लिंकेन ने स्ट्राइक को लेकर लिया भारत का नाम
अभी चाहे अमेरिका अफगानिस्तान से निकल चुका है लेकिन वहां से कोई खतरा निकलकर के उसके देश तक न पहुंचे इसके लिये वो आस पड़ोस के देशो से उस पर काबू रखना चाहता है. इस सम्बन्ध में जब एंथनी ब्लिंकेन से सवाल किया गया कि आगे वो इसे अफगान रीजन को कैसे काबू में रखेंगे? तो इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि हम ‘नयी दिल्ली’ के साथ में इस बारे में ड्रोन स्ट्राइक को आदि लेकर के काफी गहरी बातचीत कर रहे है.

यहाँ पर साफ़ तौर पर उनकी बात से नजर आता है कि इसके लिए वो भारत की जमीन का इस्तेमाल करना चाहते है. अब ऐसे में अगर अमेरिका भारत से परमानेंट मिलिट्री बेस की डिमांड भविष्य में करता है जैसा एंथनी ब्लिंकेन ने इशारा किया है तो अपनी संप्रभुता के मद्देनजर जाहिर तौर पर भारत इसे कभी भी मानने वाला नही है.

लेमोआ समझौता का उपयोग करके दी जा सकती है मदद
भारत कोई परमानेंट बेस तो अमेरिका को उपलब्ध शायद न ही करवाए लेकिन दोनों देशो के बीच में ‘लेमोआ समझौता’ हो चुका है. इसके तहत दोनों देश एक दुसरे के एयरक्राफ्ट, ड्रोन, शिप, जवानो आदि को बीच रास्ते में अपने जमीन पर रूककर लोजिस्टिक में मदद करेंगे, यानी जैसे उनको डेरा डालना है उनको फ्यूल भरना है इन सब चीजो में दोनों देश एक दुसरे की मदद करेंगे इस पर पहले ही समझौता हो रखा है.

तो संभव है कि लेमोआ समझौता के तहत भारत को अमेरिका की मदद करनी पड़े मगर कोई स्थायी मिलिट्री बेस के लिए तो भारत का राजी होना कोई भी संभावना प्रदर्शित ही नही करता है.

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