अमेरिका ने दिया सऊदी अरब को बड़ा झटका, भारत के लिये आया मौका

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सऊदी अरब आज विश्व में सबसे बड़े आयल सप्लाई करने वाले देशो में से एक है और आज के समय में अमेरिका का धीरे धीरे आयल में इंटरेस्ट कम होता चला जा  रहा है क्योंकि आम तौर पर जरूरत का आयल उसके पास में पहले से ही है और फिर दुनिया इलेक्ट्रिक की तरफ बढती चली जा रही है. ऐसे में अमेरिका की रुचि इन दिनों में मिडल ईस्ट से हटकर के इंडो पेसिफिक की तरफ अधिक होने लगी है, जहाँ से चिप शोर्टेज जैसी दिक्कते सोल्व की जा सकती है.

अमेरिका का बड़ा कदम, सऊदी से अपना डिफेन्स सिस्टम हटाने पर काम
आपको एक बात तो मालूम ही होगी कि सऊदी अरब में आज की तारीख में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक है और वहां पर सीमाओं की सुरक्षा के लिए अमेरिका का पेट्रियोटिक डिफेन्स सिस्टम भी लगा रखा था जिसकी बैटरीज उन्होंने हाल ही में निकाल ली है. खुद सऊदी अरब के एक बड़े अधिकारी ने इस बात को कन्फर्म किया है, इससे ये अंदेशा मिल गया है कि अफगानिस्तान के बाद में अमेरिका संभवतः सऊदी अरब को भी अपने हाल पर छोड़ सकता है.

भारत के लिए चांस, सऊदी और यूएई से बढ़ सकते है डिफेन्स सम्बन्ध
अभी जैसे जैसे अमेरिका सऊदी अरब से बाहर निकल रहा है वैसे वैसे मिडल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ने के चांस है. ऐसे में भारत के इन देशो से सम्बन्ध अच्छे है और इस स्थिति में भारत के विदेश अधिकारी पहले से ही सऊदी लोगो से अपनी दोस्ती बेहतर करने में लगे हुए है. इसके बदले में भारत चाहे तो अपने अरबो के वीपन जो डीआरडीओ ने बनाये है वो इनको एक्सपोर्ट कर सकता है और खूब पैसा बना सकता है, या फिर उनकी सुरक्षा के लिए अमेरिका को रिप्लेस भी कर सकता है और बदले में मिलेगा खूब सारा तेल और उसका एक्सेस.

अमेरिका की नीति बदल चुकी है, अब आसियान और यूरोप है भविष्य
कभी एक वक्त में अमेरिका मिडल ईस्ट को लेकर काफी संवेदनशील था लेकिन अब तेल का महत्त्व धीरे धीरे खोता चला जा रहा है क्योंकि ऊर्जा उत्पादन के लिए कई अन्य तरीके आ चुके है और फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल जो आने वाले भविष्य में तेल की गाडियो को रिप्लेस करेंगे वो तो मिडल ईस्ट के महत्त्व को समाप्त ही कर देगा.

ऐसे में अमेरिका का ध्यान जापान, ताइवान, भारत, वियतनाम और यूरोप के कई देशो की तरफ बढ़ चुका है जो ऊर्जा उत्पादन, सिलिकॉन चिप निर्माण, लिथियम आयन बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक मेनुफक्चारिंग जैसे कार्यो में उन्नत है क्योंकि यही तो भविष्य को लिखने वाले है. कुल मिलाकर मिडल ईस्ट का समय काल अब समाप्ति की ओर है.

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