टेंशन में ममता बनर्जी, चली जायेगी 1 महीने में सीएम की कुर्सी अगर

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अभी वैसे तो ममता बनर्जी बंगाल में सबसे बड़ी और प्रभावशाली नेता के तौर पर जानी जाती है और जिस तरह से उन्होंने अपने आपको पिछले विधानसभा चुनावों में स्थापित किया है उसके बाद में टीएमसी का कद तो बढ़ा है लेकिन खुद ममता बनर्जी की हैसियत कम जरुर हो गयी है, क्योंकि अपनी पार्टी को चुनाव जिताने वाली ममता बनर्जी अपनी खुदकी सीट हार गयी थी. इस कारण से वो बिना विधायक बने मुख्यमंत्री बनी हुई है और अब उनके पास में एक ही रास्ता बचा हुआ है.

30 सितम्बर को है उपचुनाव, हार गयी तो नही रहेगा मुख्यमंत्री पद पर हक
ममता बनर्जी का आपको मालूम ही होगा कि नंदीग्राम में चुनाव हार जाना उनके लिए काफी अधिक शर्मिंदगी का विषय रहा और अब जब उनको सीएम के पद पर बने रहना है तो छः महीनो के भीतर विधायकी हासिल करना जरूरी होता है. इस कारण से ममता बनर्जी इस बार भवानीपुर से उपचुनाव लड़ने जा रही है. कही न कही उनके लिये ये अपना पूरा करियर बचाने का दांव है क्योंकि एक चुनाव शुभेंदु अधिकारी से तो वो हार ही चुकी है.

ऐसे में अगर दुसरे उपचुनाव में भवानीपुर में भी वही हाल हुआ और दुबारा से बीजेपी उनको हारने में कामयाब हो जाती है तो न सिर्फ ममता बनर्जी अपनी सीएम की कुर्सी से हाथ धो सकती है बल्कि उनकी मजबूत छवि भी कमजोर पड़ सकती है जिससे उनसे छोटे कद वाले नेता उनको साइड लाइन करके पूरी पार्टी का कण्ट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश करेंगे इसलिए ममता बनर्जी के लिए ये चुनाव जीतना तो अति आवश्यक हो गया है.

भाजपा भी दिखा रही दमख़म, तथागत रॉय दे सकते है चुनौती
भारतीय जनता पार्टी भी इस सुनहरे मौके को पूरी तरह से भुनाने के लिए अपना जोर दिखा रही है और 30 सितम्बर को होने वाले उपचुनावों में ममता बनर्जी के सामने अपने प्रत्याशी को उतारने की पूरी तैयारी कर रही है. वैसे तो लिस्ट में कई नाम है लेकिन तथागत रॉय का नाम इनमे सबसे ऊपर है.

अब देखना यही होता है कि इस उपचुनाव को जीतकर के ममता बनर्जी अपनी कुर्सी बचा पाती है या फिर उनके लिए ये राजनीतिक करियर में बहुत बड़ी गिरावट वाला महीना साबित होने वाला है.

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