मोदी सरकार और टाटा मिलकर चीन पर बड़ा वार करने जा रहे है, जिससे उसकी हालत खस्ता हो जायेगी

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आज के समय में भारत के बहुत ही अधिक तीव्रता से उभर रही अर्थव्यवस्था है जो अपने आप में चीन के अल्टरनेट के तौर पर भी देखा जाता है. कही न कही चाइना के मेनुफेक्चारिंग के साम्राज्य को हिलाने लायक अगर दुनिया किसी को समझ रही है तो वो भारत ही है. अब यहाँ की सरकार और कॉर्पोरेट घराने भी इस बात को बहुत अच्छे से समझ चुके है और इस कड़ी में एक ऐसा काम करने जा रहे है जो अपने आप में काफी बड़ा काम हो सकता है.

सेमीकंडक्टर के निर्माण की तैयारी में टाटा समूह, चीन के व्यापार की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है
भारत के टाटा समूह ने अभी हाल ही में निर्णय लिया है कि वो जल्द ही भारत में ही सेमीकंडक्टर का निर्माण करेंगे. इस मामले में टाटा समूह के वर्तमान चेयरमेन चन्द्रशेखरन ने बयान में कहा है कि हम जल्द ही सेमीकंडक्टर के व्यापार में जाने की संभावनाओं पर काम कर रहे है. टाटा समूह इस पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रहा है और इसकी टेक्नोलॉजी को अपने स्तर पर विकसित करने की कोशिश करेगा और ये चीन के लिए बड़ी चोट होगा.

मोबाइल से लेकर गाडी तक हर चीज में होता है सेमीकंडक्टर
आज की दुनिया में जहाँ पर भी इलेक्ट्रॉनिक्स है वहां पर सेमीकंडक्टर होता ही है. फोन से लेकर रसोई के समान हो या फिर कार हो या फिर हवाई जहाज ही क्यों न हो? हर चीज के मूल में सेमी कंडक्टर होता है और आज विश्व का अधिकतर सेमीकंडक्टर चीन में ही बनता है. कोई और देश व इसकी कम्पनियां इस रिस्की व्यापार में हाथ नही डालना चाहती क्योंकि इसमें बहुत ही भारी अरबो खरबों का निवेश होता है मगर भारत ये करने जा रहा है इसके पीछे कारण भी है.

टाटा समूह जानता है कि आज भारत की लोकल डोमेस्टिक डिमांड ही इतनी ज्यादा है कि हम जो निवेश करेंगे वो तो फल ही जायेगा और हो सकता है हम इसे एक्सपोर्ट करके सरकार के सहारे चीन को पछाड़ दे. आज की तारीख में विश्व में सेमीकंडक्टर की इंडस्ट्री 527 बिलियन डॉलर से भी अधिक की है. इस चीज की अहमियत इतनी अधिक है कि अगर इसकी कम्पनियां अपना निर्माण रोक दे तो पूरी दुनिया ठप्प हो सकती है.

अगर भारतीय कम्पनियां इसे बनाने लग जाती है तो भारत में भी चीन की ही तरह पैसा बरसने लग सकता है और ये मेक इन इंडिया की तरह क्रांतिकारी कदम हो सकता है क्योंकि इसके बाद में भारत में हर तरह का वर्ल्ड क्लास इलेक्ट्रॉनिक आइटम भारत ही शुद्ध रूप से बनाना काफी आसान हो जाएगा. इससे भारत चीन से बिलियन डॉलर का व्यापार अपनी तरफ ले सकता है.

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