पुतिन ने रूस के दरवाजे किये सील, लिया अफगानिस्तान को लेकर बड़ा फैसला

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अभी के लिए अफगानिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है या फिर भविष्य में होने जा रहा है वो हर कोई देख रहा है. किस तरह से तालिबान नाम के एक संगठन ने बहुत ही अधिक तीव्रता के साथ में एक पूरे देश के ऊपर कब्जा कर लिया और विजय हासिल करके दिखाई मगर इसके कारण से वहां से लोकतंत्र खत्म हो गया है. ऐसे में लाखो की संख्या में लोग है जो वहां से भागना चाहते है जिसके कारण से ये दुसरे देशो में शरणार्थी बनकर के जगह हासिल कर रहे है.

रूस बोला, किसी भी अफगानिस्तान से आने वालो को नही देंगे शरण
अभी हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्हाल्दिमिर पुतिन की तरफ से एक स्टेटमेंट जारी किया गया है जिसमे वो कहते है कि हम नही चाहते अफगानिस्तान के आतकी शरणार्थी के रूप में हमारे देश में घुस जाये. हम ये सब कुछ पहले भी झेल चुके है और उसी बात को एक बार फिर से दोहराना हमें ठीक नही लगता. हम पश्चिमी देशो के साथ मिलकर के अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए काम करेंगे लेकिन वहां के लोगो को अपने देश में आने की अनुमति नही देंगे.

अपनी शान्ति खोना नही चाहते
पुतिन ने अपनी पुरानी घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि जब 2000 के टाइम में हम लोग काकेशस में लड़ रहे थे तो उस वक्त में शरणार्थी की आड़ में गलत लोग हमारे देश में घुस आये थे और फिर उन्होंने अपनी मनमानी शुरू कर दी. हम इन लोगो को अपने देश में बसाकर के अपनी शान्ति को खोना नही चाहते है.

सीरिया जैसे देशो के नागरिक भी बने है गलत मिसाल
कई मुस्लिम देश है जहाँ से लाखो की संख्या में लोग दुसरे देशो में भागकर के पहुंचे है और उनके पहुँचने के बाद में उनको शरण तो दी गयी लेकिन इनके वहां पर बसने के बाद में इन्होने अपने मजहब से जुड़े नियम बाकी देशो पर थोपने की कोशिश करनी शुरू कर दी जिसे वहां के नागरिक और सत्ताएँ पसंद नही करती है.

ऐसे में आपस में विवाद शुरू होता है. संभव है रूस के बाद में और भी कई देश हो जो इसी पालिसी को फॉलो करे और अफगान नागरिको को शरण देने से मना करे और उनसे कहे कि आपका देश खुद आजाद करवा लीजिये और उसे अपने हिसाब से संभालिये.

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