तालिबान से हाथ मिलाकर भारत का मुकाबला करना चाहता है इमरान, अमेरिका का बड़ा दावा

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अभी फ़िलहाल के लिये आपको एक बात तो मालूम ही है कि अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर निकल चुका है और वहां पर आज की तारीख में तालिबान का शासन आ भी चुका है. स्थिति की गंभीरता को देखा जाए तो एशिया में हालात और समीकरण के बदलने पर जोर नजर आ रहा है. अभी अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार नही है और वहां पर एक तरह का तालिबान राज आ चुका है जिसे अपने आप में पाकिस्तान का समर्थन हासिल है मगर ये कोई मुफ्त में नही किया जा रहा है.

अमेरिका की डिफेन्स इंटेलिजेंस एजेंसी का दावा, पाकिस्तान तालिबान से हाथ मिलाकर भारत का मुकाबला करना चाहता है
अभी जैसा कि आप जानते है साउथ एशिया में सबसे बड़ी सुपर पॉवर कोई है तो वो भारत है और पीएम मोदी के आने के बाद से तो भारत की ताकत एक अलग ही लेवल पर चल रही है. अब ऐसे समय में पाकिस्तान अकेला सा पड़ गया था मगर अब वो एक साथी तलाश रहा था जिसकी तलाश उसकी पूरी हो गयी है और ये बात हम नही बल्कि अमेरिका की डिफेन्स इंटेलीजेन्स एजेंसी के द्वारा कहा गया है.

अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने शान्ति वार्ताओ को भी सपोर्ट किया है और तालिबान के साथ में भी सम्बन्ध बनाये है. इसके पीछे पाकिस्तान का मकसद भारत के बढ़ते हुए प्रभाव का मुकाबला करना है क्योंकि अभी वो रणनीतिक रूप से बिलकुल अकेला और अलग थलग पड़ा हुआ है. भारत के विशालकाय प्रभाव से निपटने के लिए पाकिस्तान अब तालिबान का इस्तेमाल करना चाह रहा है ऐसा माना जा रहा है.

पाक के सीमावर्ती इलाको में तालिबान को सपोर्ट करने के लिए चन्दा
रिपोर्ट की माने तो पाकिस्तान के कई सीमावर्ती इलाको जैसे क्वेटा और कुल्चक बाईपास आदि में तालिबान के सपोर्ट में चन्दा भी माँगा जाता है और बड़ी संख्या में लोग 50 डॉलर तक का चंदा देते भी है.

यानी इस हिसाब से अमेरिका भी लगभग मान ही चुका है कि तालिबान को खड़ा करने के पीछे पाक का हाथ है और इसका परिणाम अब पूरे विश्व को भोगना पड़ेगा क्योंकि ये तालिबानी लोग अब शान्ति के साथ में बाकियों को तो रहने नही देंगे.

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