चीन की गोद में जाकर बैठ गया तालिबान, हाथ फैलाकर कही ये बात

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अभी के लिए तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता में आ चुका है और ये हम लोगो ने भी देखा है कि किस तरह से ताकत के दम पर उन्होंने सत्ता को हासिल कर लिया है और ये हम भी बखूबी जानते है. कही न कही इसे हम सभी ने काफी करीब से देख भी लिया कि कैसे अचानक से इन लोगो ने वहां की लोकतांत्रिक सरकार को हटा दिया है. अब ऐसे हालातो में एक बात साफ़ तौर पर दिखाई देती है कि इनको देश चलाने के लिए पैसे की जरूरत तो पड़ेगी जो इनके पास में है नही.

अफगानिस्तान के पुनार्निमाण में अहम भूमिका निभा सकता है चीन
अपनी आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए पाक की राह पर तालिबान भी चल पड़ा है और उसने चीन को मक्खन लगाना शुरू कर दिया है जो हम लोग हर तरफ देख पा रहे है. अभी हाल ही में अपने जारी बयान में तालिबान ने कहा है कि चीन ने शान्ति और सुलह में बड़ी ही अहम भूमिका निभाई है. अब देश के पुनर्निमाण में उसका खुले दिल से हम लोग स्वागत करते है.

चीन एक बहुत ही बड़ा देश है और उसकी अर्थव्यवस्था बड़ी विशाल है. मेरा तो ये मानना है कि अफगानिस्तान में लोगो के पुनर्वास में और यहाँ पर पुनर्निमाण करने में चीन एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. अभी तालिबान ये उम्मीद कर रहा है कि आने वाले वक्त में चीन उनके देश में अपना पैसा डालेगा और वो लोग इससे देश चला पायेंगे. ये उनकी एक मास्टर स्ट्रेटजी के देखी जा रही है.

चीन को अफगानिस्तान के रिसोर्स बेच सकता है तालिबान
अभी क्योंकि तालिबान के कण्ट्रोल में पूरा अफगानिस्तान है और चीन कुछ भी मुफ्त में तो देता नही है. ऐसे में तालिबान संभव है कि आने वाले वक्त में बड़ी बड़ी जमीने और कई माइंस और खनिज आदि के भण्डार चीन को सौंप दे जहाँ से वो अरबो खरबों डॉलर कमा सकता है और इसका एक छोटा हिस्सा तालिबानियों को मौज के लिए दे दिया करेगा और इसमें पिसेगी अफगानिस्तान की जनता.

अभी भविष्य में पूरी दुनिया देख रही है कि तालिबान चीन के कर्ज जाल में फंसने वाला है और इस तरह से चाइना अफगानिस्तान को भी अगला श्रीलंका जैसा देश बना देगा जो उसके कब्जे में रहेगा या उसका बड़ा हिस्सा उसके कब्जे में रहेगा. ये अमेरिका की स्ट्रेटजिक हार मानी जाएगी अगर जल्द ही तालिबान को सत्ता से नही निकाला गया.

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