तालिबान ने सत्ता में आते ही लिया भारत के खिलाफ फैसला, अब मोदी के पास एक ही रास्ता बचा है

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अभी अफगानिस्तान में जो कुछ भी हालात बन चुके है वो किसी से भी छुपे हुए नही है. ऐसे वक्त में अधिकतर लोग है जो यही कह रहे है कि चलो आने वाले वक्त में ये शायद सुधर जायेंगे लेकिन हाल ही में इन्होने पॉवर में आते ही जो किया है वो अपने आप में चिंतनीय है, क्योंकि अभी हाल ही में मुंह पर तो ये लोग मीठे बन रहे है और अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे है. मगर ग्राउंड पर देखने जाए तो फिर हकीकत कुछ और ही है.

तालिबान ने भारत से आयात निर्यात को बैन किया, दोनों तरफ कई आवश्यक चीजो के दाम बढे
अभी के लिये तालिबान ने भारत के साथ में होने वाले अपने व्यापार के ऊपर रोक लगा दी है. इसके पीछे का कारन इसने कुछ भी स्पष्ट नही बताया है मगर अब इससे दोनों देशो को हर रोज अरबो रूपये का  नुकसान हो रहा है. भारत में इसके कारण से ड्राई फ्रूट्स के दाम 100 से 200 रूपये बढ़ चुके है और अफगानिस्तान में शक्कर के भाव आसामान छू सकते है. इसके अलावा और भी कई चीजे है जिससे लाखो व्यापारियों के काम पर ताला लगने जैसे हाल बन सकते है.

भारत के एक ही रास्ता, नोर्दर्न अलायन्स को करे मजबूत
अब ऐसी स्थिति में जब तालिबान ग्राउंड पर भारत विरोधी काम कर रहा है तो जियोपोलीटिकल एनालिस्ट्स मानते है कि भारत को भी अपने असली अंदाज में आ जाना चाहिए और अफगानिस्तान में तालिबान का सामना कर रहे नोर्दर्न अलायन्स की मदद कर देनी चाहिए. अमरुल्लाह सालेह और कई बड़े नेताओं के सपोर्ट से हजारो की संख्या में इन लोगो ने पंजशीर वैली पर कब्जा कर लिया है और ये लोग पूरी तरह से प्रो इंडिया है, ऐसे में इनको सपोर्ट करके जिता दिया जाता है तो फिर दुबारा से अफगानिस्तान मोदी के पाले में आ सकता है.

हालांकि ये कोई पहली बार नही है जब भारत के पास में ऐसा करने का मौक़ा आया है. इससे पहले भी भारत ने अनाधिकारिक तौर पर रिपोर्ट्स के अनुसार अपने ताजिकिस्तान स्थित बेस से नोर्दर्न अलायन्स को सपोर्ट भेजा था. अगर अब दुबारा से ऐसा किया जाता है और वेस्टर्न वर्ल्ड इसमें साथ दे देता है तो दुबारा से तालिबान को हटाना भारत के लिए अधिक मुस्किल काम नही होगा क्योंकि अब भारत को आर्थिक तौर पर ये लोग नुकसान पहुंचा रहे है.

तालिबान एक दिन वादा  करता है, अगले दिन मुकर जाता है
अभी के लिए अगर भारत ये सोच भी रहा है कि हम तालिबान से बात करे तो इतिहास के तौर पर अमेरिका इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि तालिबान एक दिन में कोई वादा करता है और अगले दिन उसका मूड बदल जाए तो वादा तोड़ देता है. ऐसे में इसके साथ भारत का सामजस्य बैठ पाना मुश्किल है और जब तक तालिबान हटता नही भारतीय व्यापारियों के ऊपर चिंता बनी रहेगी.

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