तालिबान की अफगानिस्तान में जीत पर इमरान खान ने दिया बेशर्मी भरा बयान

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अभी आपको तो मालूम ही होगा कि अफगानिस्तान में तालिबान ने वहां की फ़ोर्स और सरकार को हटाकर के सत्ता हासिल कर ली है और ये अपने आप में बहुत ही बड़ी बात है क्योंकि अमेरिका ने इन फोर्सेज को पूरे 20 साल तक ट्रेनिंग दी लेकिन फिर भी इससे कुछ भी हासिल नही हो सका. आखिर में जैसे ही अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से निकली वैसे ही तालिबान ने जीत हासिल करनी शुरू कर दी और लगभग दो हफ्तों के भीतर भीतर ही काबुल को जीत लिया. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी भी देश छोड़कर भाग गये, इस पर पाक की प्रतिक्रिया आयी है.

इमरान खान का बयान, तोड़ दी गुलामी की जंजीरे
इमरान खान ने एक ऐसा बयान दिया है जो करोडो अफगान लोगो के मानवाधिकारों का मजाक उड़ाने के जैसा है. इमरान ने अपने बयान में कहा कि जब आप दूसरो का कल्चर अपनाते है तो फिर आप मानसिक रूप से गुलाम होते है. ये असल की गुलामी से भी बुरा है और सांस्कृतिक गुलामी को तोडना कोई आसान काम नही होता है. अफगानिस्तान में इन दिनों में जो कुछ भी हो रहा है वो गुलामी की जंजीरों को तोड़ने जैसा है.

इमरान खुलकर तालिबान के समर्थन में, बेबस बायडन
कभी वर्ल्ड लीडर और सुपरपॉवर जैसे पदों से नवाजे जाने वाले जो बायडन का कण्ट्रोल आज के वक्त में पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान पर भी नही रहा है जो अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से भागने पर  एक तरह से जश्न मनाते और तालिबान को चीयर करते हुए नजर आ रहे है. कही न कही अब इससे ये तो स्पष्ट हो ही गया है कि आने वाले वक्त में पाक को इसका झटका अमेरिका वित्तीय रूप में देने वाला है.

माना जा रहा है कि जिस खुले दिल से इमरान खान ने तालिबान का सत्ता में स्वागत कर दिया है उसके पीछे उसके सर पर जाहिर तौर पर चीन और जिनपिंग का हाथ है क्योंकि अकेले इमरान में तो इतनी हिम्मत नही थी कि वो अमेरिकी फ़ोर्स के अफगान से निकलने पर और तालिबान की जीत पर इस तरह से जश्न मनाने लगे.

मानव अधिकारों का कोई वजूद नही
इमरान जैसे नेताओं के लिये मानव अधिकारों का  असल में कोई भी वजूद नही है. आज अफगानिस्तान में लगभग साढ़े तीन करोड़ लोगो मासूम बच्चो, प्यारी लडकियों के साथ में आगे चलकर क्या होगा और उनकी जिन्दगी कैसी बुरी होने वाली है ये तो कोई कल्पना भी नही कर सकता है.

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